UAE पर ईरान का बड़ा हमला, दो बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद यूएई ने ईरान के साथ व्यापार किया बंद.

अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे तनाव के बीच अब खाड़ी देशों पर भी इसका असर साफ दिखने लगा है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष को अब पांच महीने से ज्यादा का समय हो चुका है और इस दौरान ईरान की सैन्य ताकत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पिछले दिनों यह बयान दिया था कि ईरान के पास अब हथियार बनाने की क्षमता बहुत कम बची है और उनके हथियार तेजी से खत्म हो रहे हैं। इसके विपरीत, ईरान लगातार अपनी सैन्य और औद्योगिक मजबूती का दावा कर रहा है ताकि दुनिया को यह दिखाया जा सके कि युद्ध के बावजूद उनकी ताकत कम नहीं हुई है।
ईरान के रुख में बदलाव और पड़ोसी देशों को चेतावनी
ईरान के उप रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल Shahrukh Shahram ने हाल ही में दावा किया कि युद्ध के दौरान भी उनके देश में आधुनिक हथियारों का उत्पादन बढ़ा है। इस संघर्ष के दौरान ईरान ने रूस की मदद से तैयार किए गए शाहेद ड्रोन और अन्य साजो-सामान का इस्तेमाल किया है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 18 अगस्त 2026 को यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की कि ईरान की तरफ से यूएई पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इस खतरनाक हमले के बाद यूएई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ अपने सभी तरह के व्यापारिक रिश्तों को पूरी तरह से स्थगित कर दिया है।
तनाव को और बढ़ाते हुए 22 अगस्त 2026 को ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Mohammad Akraminia ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि वे अपनी रक्षात्मक नीति को छोड़कर अब आक्रामक सैन्य रुख अपना रहे हैं। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने उन सभी पड़ोसी देशों को खुली चेतावनी दी है जो अमेरिकी सेना को किसी भी तरह की मदद दे रहे हैं। ईरान का साफ कहना है कि ऐसे देशों को इस युद्ध में सीधा भागीदार माना जाएगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र बताया है, जबकि ईरान इस रास्ते से आने-जाने को लेकर ओमान के साथ अलग से बातचीत कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में ईरान के राष्ट्रपति Masozh Pezeshkian, उनके उत्तराधिकारी Mojtaba Khamenei और अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका लगातार आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान की सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जिसे ईरान ने सीधे तौर पर युद्ध की घोषणा करार दिया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।