मध्य पूर्व में हालात फिर से बिगड़ गए हैं। 28 जुलाई 2026 को U.S. Central Command (CENTCOM) ने जानकारी दी कि ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिकी सेना को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उन्होंने शाम 5:45 बजे (ET) इन सभी हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इस घटना के बाद अमेरिकी सेना अलर्ट पर है।
सीजफायर की कोशिशों को झटका
इस हमले ने शांति बहाली की उम्मीदों को खत्म कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में सैन्य हमलों पर अस्थाई रोक लगाई थी ताकि बातचीत का रास्ता खुल सके, लेकिन इस हमले के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए अरबों डॉलर के अतिरिक्त फंड की मांग की है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे जॉर्डन की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। इसी दिन सऊदी अरब ने भी इराक की तरफ से आए कई ड्रोन्स को नष्ट किया, जो कथित तौर पर ईरान समर्थित मिलिशिया ने भेजे थे। जॉर्डन और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी ड्रोन देखे गए, जिन्हें रक्षा प्रणालियों ने मार गिराया। इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने इन हमलों की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश पर हमले के लिए नहीं होने देंगे।
