ईरान के रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने बताया कि अमेरिका और इसराइल के साथ हुई हालिया जंग में उन्होंने अपनी मिसाइल ताकत का बहुत छोटा हिस्सा इस्तेमाल किया था. इसका मतलब है कि ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में मिसाइलें और हमला करने के हथियार मौजूद हैं.

40 दिनों की जंग में कितनी मिसाइलें इस्तेमाल हुईं?

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Reza Talaei-Nik ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि इस जंग को 40 दिन की लड़ाई कहा गया. इस दौरान ईरान ने जानबूझकर अपनी मिसाइलों का बहुत कम हिस्सा इस्तेमाल किया. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास युद्ध से पहले की 70% मिसाइलें और 60% लॉन्चिंग सिस्टम अब भी सुरक्षित हैं. साथ ही, 100 से ज़्यादा छिपे हुए मिसाइल लॉन्चरों को फिर से चालू कर दिया गया है ताकि क्षमता को पहले जैसा बनाया जा सके.

ईरान के पास कितने हथियार हैं और ड्रोन का क्या हाल है?

ईरान का दावा है कि वह अपने देश में ही 1,000 से ज़्यादा तरह के हथियार और ड्रोन बनाता है. इसमें करीब 9,000 नॉलेज-बेस्ड कंपनियां मदद करती हैं, जिससे ईरान हथियारों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं है. हालांकि, मिसाइलों के मुकाबले ड्रोन के मामले में ईरान को ज़्यादा नुकसान हुआ है. बताया जा रहा है कि अब केवल 40% ड्रोन ही काम करने की स्थिति में हैं, जिन्हें ठीक करने का काम 8 अप्रैल के बाद से चल रहा है.

अब ईरान का अगला लक्ष्य क्या है?

ईरान ने अपने तीन मुख्य लक्ष्य तय किए हैं. पहला है युद्ध के नुकसान की भरपाई करवाना, दूसरा जान-माल की हानि के लिए जवाबदेही तय करना और तीसरा भविष्य के हमलों को रोकने के लिए ऐसी ताकत बनाना कि दुश्मन हमला न करे. प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण एक बड़ा रणनीतिक हथियार है. उन्होंने कहा कि सभी अमेरिकी बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए थे और ईरान की हमला करने की ताकत अब और बढ़ गई है.