ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. 8 जुलाई 2026 को हुए इस हमले में करीब 85 ठिकानों को निशाना बनाया गया. इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बहुत बढ़ गया है और कई देशों ने ईरान की इस हरकत की कड़ी निंदा की है.
बहरीन में इस हमले के दौरान काफी अफरा-तफरी रही. बहरीन डिफेंस फोर्स (BDF) ने बताया कि उन्होंने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक दिया, खासकर उन्हें जो रिहाइशी इलाकों की तरफ आ रहे थे. पूरे बहरीन में कई बार एयर सायरन बजाए गए, जिससे लोग डर गए. इंटीरियर मिनिस्ट्री ने आम लोगों और वहां रहने वाले प्रवासियों से शांति बनाए रखने और सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी. सरकार ने लोगों को चेतावनी दी है कि अगर उन्हें कहीं भी हमले का मलबा या बिना फटा हुआ गोला दिखे, तो उसके पास न जाएं और तुरंत इसकी सूचना दें. बहरीन के बंदर सलमान में मौजूद US Navy की 5th Fleet भी इस हमले के निशाने पर थी.
कुवैत ने भी इस हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की है. कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के इन हमलों से तनाव कम करने की कोशिशों को नुकसान पहुंच रहा है. कुवैत की सेना ने कन्फर्म किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए मोर्चा संभाला. हमले में अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाने की कोशिश की गई.
इस हमले के बाद दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. GCC महासचिव जासिम मोहम्मद अलबुदईवी ने इसे संप्रभुता पर हमला बताया. सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, मिस्र और लेबनान ने भी चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इसे अस्वीकार्य कहा, वहीं NATO सचिव मार्क रुटे ने अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ की गई पिछली कार्रवाइयों को जरूरी बताया. US Central Command (CENTCOM) ने कहा कि यह सीजफायर का सीधा उल्लंघन है.
बहरीन के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि मिसाइल और ड्रोन से सुरक्षा हासिल नहीं की जा सकती. बहरीन ने UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का हवाला दिया, जिसमें ईरान के ऐसे हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की कोशिशों की निंदा की गई है. कुवैत ने भी इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन और एक खतरनाक कदम बताया है.
