मध्य-पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। 15 और 16 जुलाई 2026 को ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। मिस्र ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक बताया है।
हमले की जानकारी और सुरक्षा व्यवस्था
ईरान के इन हमलों के जवाब में तीनों देशों की सेनाएं सतर्क दिखीं। 15 जुलाई को जॉर्डन की सेना ने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया। वहीं, 16 जुलाई को बहरीन की डिफेंस फोर्स ने कई ईरानी हवाई हमलों को नाकाम कर दिया और इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया।
कुवैत की स्थिति थोड़ी गंभीर रही। वहां की सेना ने 15 और 16 जुलाई को कई ड्रोन और मिसाइलें इंटरसेप्ट कीं, लेकिन कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि कुछ जरूरी ठिकानों को नुकसान पहुंचा है और चार सैनिक घायल भी हुए हैं। कुवैत ने इस हमले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का उल्लंघन माना है।
मिस्र और UAE ने दिया कड़ा संदेश
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि वह इन तीनों देशों की संप्रभुता के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। मिस्र ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है। इसी दिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ईरान की इन हरकतों की निंदा की है। ईरान का दावा है कि ये हमले अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किए गए हैं, जो हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के जवाब में हुए हैं।
