कुवैत में आज सुबह एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। ईरान की तरफ से दागी गईं मिसाइलों और ड्रोनों ने कुवैत को निशाना बनाया, जिसे कुवैती वायु सेना की डिफेंस प्रणालियों ने हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे कुवैत की संप्रभुता पर हमला बताया है।
ईरान ने कुवैत को क्यों बनाया निशाना और क्या था लक्ष्य
कुवैत में कैंप अरिफिजान, कैंप बुहरिंग और अली अल सलेम जैसे कई प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जहां करीब 13,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उन्होंने इन अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाकर यह हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी पुष्टि की है कि ईरान ने कुवैत की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें और एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन दागे थे, जिन्हें समय रहते रोक दिया गया। जानकारों का कहना है कि ईरान ने यह हमला अमेरिकी प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों के जवाब में किया है।
यूएई और खाड़ी देशों ने जताया कड़ा विरोध
यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले को कुवैत की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। यूएई ने इस मुश्किल समय में कुवैत के साथ अपनी एकजुटता और समर्थन को दोहराया है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अलावा सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन और बहरीन ने भी इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून व अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है।
पिछले कुछ दिनों में बढ़े हमले
कुवैत पर पिछले कुछ दिनों में लगातार कई हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 27 मई से लेकर 1 जून 2026 तक की घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से यूएई के बजाय कुवैत को निशाना बना रहा है क्योंकि कुवैत को राजनयिक रूप से यूएई की तुलना में कम आक्रामक माना जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या कुवैत पर हुए हमले में कोई नुकसान हुआ है?
कुवैती सेना और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियों ने सभी ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
ईरान ने कुवैत को ही निशाना क्यों बनाया?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के अनुसार, यह हमला कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान कुवैत को जवाबी कार्रवाई में कमजोर मानता है, इसलिए उसने इसे चुना।
