खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। 10 और 11 जून 2026 को ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन हमलों का सामना किया और हवा में ही खतरों को नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद कुवैत सहित पूरे खाड़ी देशों में हाई अलर्ट जारी है।

कुवैत और बहरीन के किन सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना?

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरान की सेना का कहना है कि उन्होंने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सेना के अली अल-सालेम (Ali al-Salem) और अहमद अल-जबर (Ahmad al-Jaber) एयरफोर्स बेस को निशाना बनाया है। इसके साथ ही बहरीन के शेख ईसा (Sheikh Isa) एयरबेस पर भी हमले किए गए। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है।

कुवैत सरकार और सेना ने सुरक्षा पर क्या निर्देश जारी किए?

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे देश की संप्रभुता पर हमला बताया है। कुवैत की सेना के जनरल स्टाफ ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के मिसाइलों और ड्रोनों को सफलतापूर्वक रोक दिया। सेना ने आम नागरिकों और प्रवासियों को सलाह दी है कि वे केवल सरकारी और आधिकारिक सूत्रों की खबरों पर ही भरोसा करें। इसके अलावा किसी भी तरह के गिरे हुए मलबे के पास जाने से बचने की चेतावनी दी गई है। सऊदी अरब और यूएई ने भी कुवैत का समर्थन करते हुए ईरान के इस कदम को क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने कुवैत में किस जगह को निशाना बनाया है?

ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सेना के अली अल-सालेम और अहमद अल-जबर एयरफोर्स बेस को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।

क्या इस हमले से कुवैत में कोई नुकसान हुआ है?

कुवैत की सेना ने साफ किया है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही हमलों को रोक दिया और लोगों को मलबे से दूर रहने की सलाह दी गई है।