ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के कारण खाड़ी देशों में हालात बिगड़ गए हैं। 12 और 13 जुलाई 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे देशों की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

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हमलों की पूरी जानकारी

IRGC ने अपनी कार्रवाई में जॉर्डन के Prince Hassan Air Base, बहरीन के Sheikh Isa Airbase और कुवैत के Ali Al-Salem और Ahmed Al-Jaber एयरबेस को निशाना बनाया। इन हमलों के पीछे ईरान ने अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय प्रांतों में किए गए हवाई हमलों का बदला लेने का दावा किया है। इसके अलावा ओमान और कतर में भी हमले की खबरें सामने आई हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

इस हमले के कारण 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर समझौता पूरी तरह टूट चुका है। जॉर्डन की सेना ने अपने हवाई क्षेत्र में आए 4 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि बहरीन ने भी ईरान के इन हमलों को एक व्यवस्थित खतरा बताया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल स्थिति को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र के सभी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

Aanya

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