ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन ताकत को लेकर दुनिया को कड़ा संदेश दिया है। ईरान के रक्षा मंत्री ने साफ़ कर दिया है कि उनकी सैन्य तकनीक पर किसी भी तरह की बातचीत या समझौता नहीं होगा। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए एक ‘रेड लाइन’ बताया है।

1 जुलाई 2026 को ईरान के रक्षा और सशस्त्र बल रसद के कार्यवाहक मंत्री ब्रिगेडियर जनरल सयेद मजीद एबनोलरेजा ने यह घोषणा की। उन्होंने अपने X अकाउंट पर जानकारी दी कि मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी हैं और इन पर कभी कोई मोलभाव नहीं हुआ और न ही भविष्य में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अपने संसाधनों और स्थानीय विशेषज्ञता से इन हथियारों का विस्तार जारी रहेगा।

ईरान के इस सख्त रुख के बीच अमेरिका और इसराइल का दबाव बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर पाबंदी लगाए। वहीं इसराइल का कहना है कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तब तक पूरा नहीं होगा जब तक उसके बढ़ते मिसाइल भंडार और सैन्य गतिविधियों पर रोक न लगे।

इस मामले में खाड़ी देशों (GCC) और अमेरिका ने एक साझा बयान जारी किया था, जिसकी ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ी निंदा की। ईरान ने इस बयान को दखल देने वाला और उकसाने वाला कदम बताया है।

हाल की बड़ी घटनाएँ

  • 29 जून 2026: ईरान ने नए और एडवांस ड्रोन और मिसाइल तैनात किए, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था।
  • 27 जून 2026: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल साइट्स और रडार सिस्टम पर हमले किए। इसी दौरान बहरीन ने भी अपने इलाके में हुए ड्रोन हमले की निंदा की।
  • 26 जून 2026: ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और GCC के उस बयान को खारिज किया जिसमें मिसाइल प्रोग्राम पर बात करने को कहा गया था।
  • 24 जून 2026: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ़ किया था कि मिसाइल प्रोग्राम अमेरिका के साथ किसी भी समझौते का हिस्सा नहीं होगा।