ईरान की बढ़ती उग्रता ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल डायरेक्टर केविन हैसेट ने साफ कहा है कि ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और उसकी हरकतों से खाड़ी देशों की सुरक्षा को खतरा है। इसका असर न सिर्फ वहां बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश पर भी पड़ सकता है।

ईरान की हरकतों से दुनिया को क्या खतरा है?

व्हाइट हाउस के डायरेक्टर केविन हैसेट ने बताया कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले GCC देशों (कुवैत, UAE, बहरीन, सऊदी अरब और कतर) की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। इससे ग्लोबल इकोनॉमी अस्थिर हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय निवेश कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर इन खतरों को खत्म किया गया, तो दुनिया भर के निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

हाल के दिनों में क्या-क्या हमले और खतरे सामने आए?

ईरान ने हाल ही में कई साइबर और सैन्य हमले किए हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं और बड़ी कंपनियों पर असर पड़ा है। नीचे दी गई टेबल में इन घटनाओं की पूरी जानकारी है:

तारीख घटना असर
29-30 मार्च 2026 कुवैत के पावर और वॉटर प्लांट पर ड्रोन हमला प्लांट को नुकसान और एक व्यक्ति की मौत
मार्च 2026 कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला DieNet ग्रुप ने सिस्टम हैक करने का दावा किया
1 अप्रैल 2026 बड़ी कंपनियों को धमकी Amazon, Microsoft, Google और Boeing को निशाना बनाने की धमकी
7 अप्रैल 2026 अमेरिका में साइबर अटैक वॉटर, एनर्जी और सरकारी सेवाओं के सिस्टम में सेंध
अप्रैल 2026 Strait of Hormuz की बंदी दुनिया भर में महंगाई और सामान की सप्लाई में कमी
अप्रैल 2026 वॉटर प्लांट पर हमला कुवैत और कतर में पानी का संकट पैदा हुआ

Gulf देशों ने अब क्या फैसला लिया है?

ईरान के लगातार हमलों के बाद अब GCC देशों की रणनीति बदल गई है। पहले ये देश मामले को शांत करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने ‘दबाव और दूरी’ की नीति अपना ली है। ईरान के साथ आर्थिक और राजनयिक रिश्ते अब कम होने की उम्मीद है। कतर ने कुवैत पर हुए हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में शिकायत भी दर्ज कराई है।