मिडिल ईस्ट में तनाव अचानक बहुत बढ़ गया है। 14 जुलाई 2026 को ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने इस ऑपरेशन को Nasr 2 नाम दिया है और इसे 12-13 जुलाई को ईरान पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों का जवाब बताया है।
हमलों का विवरण और दावा
ईरान ने दावा किया कि जॉर्डन के Prince Hassan Air Base पर हुए हमले में बड़े मिसाइल डिपो और फ्यूल टैंक जलकर राख हो गए। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने बताया कि उन्होंने अपने इलाके में घुसी चार ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है। दूसरी तरफ, बहरीन के रक्षा मंत्रालय ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की है और ईरान पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। कतर ने भी इन हमलों की कड़ी निंदा की है।
अमेरिकी रुख और ग्लोबल असर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता Captain Tim Hawkins ने बहरीन में किसी भी नुकसान की बात को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठ बताया है। US President Donald Trump ने पहले ही संसद को सूचित कर दिया था कि 7 जुलाई से ईरान के साथ फिर से युद्ध शुरू हो चुका है और संघर्ष विराम खत्म हो गया है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर दोबारा नौसेना नाकाबंदी लागू कर दी है, जिसकी वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां भी चलाईं, जिन्हें वे अवैध तरीके से गुजरता हुआ बता रहे थे।
