पूर्व NATO अधिकारी William Alberque ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक गंभीर जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि ईरान का लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम गायब है, जिसकी वजह से अमेरिका परमाणु मामले में अपनी पूरी जीत का दावा नहीं कर पा रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, नतांज़ परमाणु केंद्र पर सैन्य हमलों के बाद भी परमाणु हथियारों के फैलने का खतरा बना हुआ है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां ईरान के परमाणु भंडार की निगरानी करने में मुश्किलों का सामना कर रही हैं।

गायब यूरेनियम और परमाणु खतरे से जुड़ी बड़ी बातें

William Alberque ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गायब हुआ 440 किलो यूरेनियम काफी खतरनाक स्तर तक संवर्धित है। इससे जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां इस प्रकार हैं:

  • यह यूरेनियम 60 प्रतिशत तक शुद्ध है और इससे लगभग 10 से 12 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं।
  • जून 2025 में हुई बमबारी से पहले ही इस सामग्री को Isfahan के भूमिगत ठिकानों में छुपा दिया गया था।
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को पिछले कई महीनों से इस भंडार की जांच करने की इजाजत नहीं मिली है।
  • 21 मार्च 2026 को नतांज़ परमाणु केंद्र पर अमेरिका और इजरायल ने बड़ा हमला किया था।
  • ईरानी अधिकारियों ने हमले की पुष्टि की है लेकिन किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव से इनकार किया है।

परमाणु ठिकानों पर हमले और मौजूदा स्थिति

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए अमेरिका और इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के परमाणु भंडार को सुरक्षित करने के लिए अपनी स्पेशल फोर्सेज का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

संस्था/देश वर्तमान स्थिति और कदम
अमेरिका परमाणु सामग्री को जब्त करने के लिए सभी सैन्य विकल्प खुले रखे हैं।
ईरान हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और NPT संधि का उल्लंघन मान रहा है।
IAEA ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी और निगरानी का संपर्क टूट चुका है।
विशेषज्ञ भूमिगत ठिकानों से यूरेनियम निकालना एक बेहद जटिल सैन्य ऑपरेशन होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और चीन के ईरान के साथ बढ़ते सैन्य रिश्तों ने इस समस्या को और भी पेचीदा बना दिया है। फिलहाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है क्योंकि गायब यूरेनियम की सही जानकारी किसी के पास नहीं है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.