UAE पर ईरान का हमला, दो बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद यूएई ने सभी व्यापार और वित्तीय लेन-देन किए सस्पेंड.

Aanya20 August 20263 min read65 viewsUAE
UAE पर ईरान का हमला, दो बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद यूएई ने सभी व्यापार और वित्तीय लेन-देन किए सस्पेंड.

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब खाड़ी देशों तक पूरी तरह से पहुंच गया है। बुधवार, 19 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है, जिसे उन्होंने Economic D-Day नाम दिया है। अमेरिका का दावा है कि ईरान की नौसेना और वायु सेना पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और उसकी करेंसी की वैल्यू खत्म हो गई है। लेकिन इसके जवाब में ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान और इस आर्थिक ऑपरेशन का जमकर मजाक उड़ाया है और इसे एक दिखावा बताया है। अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी देश या कंपनी ईरान की मदद करेगी, जैसे तेल तस्करी या कैश ट्रांसफर, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

यूएई पर मिसाइल हमला और व्यापार पर रोक

इस पूरे विवाद के बीच खाड़ी देशों की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। पिछले कुछ दिनों से शांति समझौते के लिए चल रही बातचीत 18 अगस्त 2026 को व्हाइट हाउस के अधिकारियों द्वारा पूरी तरह रोक दी गई, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच बात नहीं बन पाई। इसके ठीक एक दिन पहले 17 अगस्त 2026 को सीनियर अमेरिकी वार्ताकार Jared Kushner ने बातचीत को मजबूत बताया था, लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए। पिछले दिनों 18 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने यह गंभीर आरोप लगाया कि ईरान ने उसके इलाके में दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हालांकि ईरान ने इन सभी आरोपों से पूरी तरह इंकार किया है, लेकिन इस घटना के बाद यूएई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए तेहरान के साथ अपने सभी तरह के व्यापार और वित्तीय लेन-देन को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

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खाड़ी देशों और यूरोपीय देशों को ईरान की चेतावनी

क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ईरान के सशस्त्र बलों के प्रमुख ने फारसी खाड़ी के देशों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी सैन्य अभियानों में किसी भी तरह की मदद न करें। ईरान ने साफ कहा है कि अगर किसी भी पड़ोसी देश ने अमेरिका का साथ दिया, तो उसे एक शत्रुतापूर्ण कदम माना जाएगा। इसके अलावा, फाइनेंशियल टाइम्स की 19 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष और आगे बढ़ता है, तो ईरान ने यूरोप के कुछ ठिकानों पर संभावित सैन्य हमलों को लेकर भी चर्चा की है। इस बात की जानकारी सामने आने के बाद NATO ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए करारा जवाब देने की कसम खाई है। अमेरिका की तरफ से फारसी खाड़ी में नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी पूरी सख्ती के साथ जारी है।

ईरान के भीतर आंतरिक और राजनीतिक स्थिति

ईरान के अंदर सरकार अभी भी पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाए हुए है। देश के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian, परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख Mohammad Eslami, और बासिज कमांडर Hossein Taeb जैसे बड़े नेता देश की नीति तय कर रहे हैं। आईआरजीसी के कमांडर मेजर जनरल Ahmad Vahidi ने अमेरिका द्वारा तय किए गए बातचीत के समय को खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिका ने अपने शुरुआती वादों को पूरा नहीं किया है। ईरान के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि अगर अमेरिका अपनी सभी बड़ी मांगें छोड़ दे, तो किसी समझौते पर बात हो सकती है। लेकिन इस समय ईरान सरकार अपने देश के अंदरूनी आर्थिक हालात और संभावित जनता के गुस्से को लेकर भी काफी चिंता में है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत के लोगों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि युद्ध जैसे हालातों का सीधा असर खाड़ी की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ता है।

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