अमेरिका के 'इकोनॉमिक डी-डे' प्रतिबंधों पर ईरान का पलटवार, कहा यह खुद अमेरिका की अपनी आर्थिक नाकामी से ध्यान भटकाने की चाल है

ईरान ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे अमेरिका की अपनी घरेलू आर्थिक परेशानियों से ध्यान हटाने का जरिया बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने करीब 20 अगस्त 2026 को इस आर्थिक युद्ध अभियान की शुरुआत की थी, जिसे वाशिंगटन में Economic D-Day का नाम दिया गया। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इस अभियान को ईरान regime के सभी आर्थिक रास्तों को बंद करने वाला सबसे बड़ा वित्तीय आक्रमण बताया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी दी थी कि जो भी देश या संगठन ईरान की मदद करेगा, उसे भारी आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
ईरान के मंत्रियों और अधिकारियों का तीखा जवाब
इस अमेरिकी कदम के जवाब में ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इस पहल को पूरी तरह फेल बताया और अमेरिकी कार्रवाइयों को आर्थिक आतंकवाद करार दिया जो वैश्विक संप्रभुता के लिए खतरा है। अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh ने बताया कि तेहरान इन खास प्रतिबंधों के लिए पिछले दो साल से तैयारी कर रहा था और उन्हें पूरा भरोसा है कि अमेरिका की यह योजना आखिरकार फेल हो जाएगी। इसके अलावा, ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों ने अमेरिकी धमकियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय आक्रमण के औचित्य पर सवाल उठाया, जबकि पहले यह दावा किया जाता रहा है कि ईरान की सैन्य क्षमताएं पूरी तरह खत्म कर दी गई हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव और कूटनीतिक कोशिशें
होरमुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमले की खबरों और तेहरान के गैस स्टेशनों पर लंबी कतारों के बाद वहां के हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। इन तमाम दबावों के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बातचीत की, जिसमें मुख्य रूप से होरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और कूटनीतिक बातचीत को दोबारा शुरू करने पर जोर दिया गया। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह वैध व्यापारिक मामलों में दखलअंदाजी न करे और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करे। इस बारे में अधिक जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बात का संकल्प लिया है कि वे इसका पूरा जवाब देंगे और दूसरे देशों को भी अमेरिका के नेतृत्व वाले इस आर्थिक अभियान का साथ देने के खिलाफ चेतावनी दी है।