ईरान की फुटबॉल टीम ने FIFA World Cup 2026 में अपनी खेल भावना के साथ-साथ एक बड़ा संदेश दुनिया को दिया है। टीम ने मिनाब में हुए स्कूल हमले के पीड़ितों की याद में गोल्ड पिन पहने और खुद को ‘Minab 168’ के नाम से पहचाना। यह कदम उन बच्चों और शिक्षकों के सम्मान में उठाया गया जो एक दर्दनाक हमले में अपनी जान गंवा बैठे थे।

मामला 28 फरवरी 2026 का है जब मिनाब के Shajareh Tayyebeh प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में करीब 168 से 175 छात्रों और शिक्षकों की मौत हो गई थी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इसे एक सोची-समझी और भयानक युद्ध अपराध बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला टॉमहॉक मिसाइलों से दो चरणों में किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा आम लोग मारे जाएं।

ईरान की टीम ने इस दुख को खेल के मैदान तक पहुँचाया। मार्च में नाइजीरिया और कोस्टा रिका के खिलाफ मैचों से पहले खिलाड़ियों ने स्कूल बैग पकड़े और काली पट्टी बांधी थी। वर्ल्ड कप के दौरान टीम ने ‘Minab 168’ नाम अपनाया और गोल्ड पिन पहने। फुटबॉल फेडरेशन के उपाध्यक्ष Mehdi Mohammad Nabi ने बताया कि यह खिलाड़ियों का सामूहिक फैसला था क्योंकि वे स्कूल बमबारी से काफी दुखी थे।

15 जून 2026 को ईरान का पहला मैच New Zealand के खिलाफ हुआ जिसमें स्कोर 2-2 की बराबरी पर रहा। इस दौरान स्टेडियम के बाहर ईरानी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए। वहीं कुछ समर्थकों ने FIFA के नियमों को तोड़कर स्टेडियम के अंदर पुराने ईरानी झंडों का प्रदर्शन किया।

इस घटना पर अमेरिका की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि एक गलती की वजह से टॉमहॉक मिसाइल स्कूल पर गिरी क्योंकि डेटा पुराना था। हालांकि, ईरान के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने अमेरिका के इस दावे को पूरी तरह गलत और झूठ बताया। विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में चुप न रहने और दोषियों को सजा देने की अपील की है।