ईरान में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद अब उनके बेटे मुजताबा खामेनेई ने देश की कमान संभाल ली है. इस बदलाव से ईरान के तौर-तरीकों और दुनिया के साथ उसके रिश्तों में बड़ा असर दिख रहा है.

कैसे हुआ सत्ता का यह बदलाव

जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को तेहरान में अमेरिका और इसराइल के एक साझा हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी. ईरान सरकार ने 1 मार्च 2026 को उनकी मौत की पुष्टि की. इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए थे.

मौत के बाद 1 मार्च को एक अंतरिम नेतृत्व परिषद बनाई गई. इसके बाद 3 से 8 मार्च तक विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) ने चुनाव कराया और 9 मार्च 2026 को मुजताबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया.

मुजताबा खामेनेई की स्थिति और नया रुख

जुलाई 3 से 9 तारीख के बीच ईरान और इराक में अली खामेनेई के जनाजे की रस्में निभाई जा रही हैं. हालांकि, नए लीडर मुजताबा खामेनेई इनमें नजर नहीं आए हैं. बताया जा रहा है कि वह भी उसी हमले में घायल हुए थे और इसराइल की धमकियों के कारण छिपे हुए हैं. वह सिर्फ लिखित संदेशों के जरिए बात कर रहे हैं.

मुजताबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान अब पहले से ज्यादा सख्त रुख अपना रहा है. ईरान ने इस हत्या के लिए अमेरिका और इसराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है.

अमेरिका के साथ समझौता और विवाद

फरवरी 2026 में शुरू हुए युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका ने 17 जून 2026 को एक समझौते (MoU) पर दस्तखत किए. इस समझौते की मुख्य बातें ये हैं:

  • लेबनान में युद्ध और दुश्मनी खत्म होगी.
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर लगी पाबंदियां हटेंगी.
  • क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी कम होगी.
  • ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी.

इन सबके बावजूद ईरान के अंदरूनी गुटों में मतभेद हैं. कुछ कट्टरपंथी चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूरा कब्जा रहे. मुजताबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि जब तक पूरी तरह युद्धविराम नहीं होता, तब तक परमाणु कार्यक्रम (nuclear program) पर कोई बात नहीं होगी. ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह जहाजों को अपने तय रास्तों पर चलाने के लिए ताकत का इस्तेमाल करना जारी रखेगा.