ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले समुद्री जहाजों के लिए एक नया रजिस्ट्रेशन और चेकिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। Lloyd’s List की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर चुनिंदा पाबंदी लगाने की ओर बढ़ रहा है। इस नए सिस्टम के तहत अब जहाजों को वहां से गुजरने के लिए अपनी पूरी जानकारी पहले ही ईरानी अधिकारियों को देनी होगी।
नए नियमों के तहत जहाजों को क्या करना होगा?
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) इस नए सिस्टम को विकसित कर रही है। अब जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरना चाहेंगे, उन्हें अपनी ओनरशिप और माल कहां जा रहा है, इसकी पूरी जानकारी पहले ही देनी होगी। इसके लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं जो नीचे दिए गए हैं:
- जहाजों को अपनी जानकारी ईरान से जुड़े उन लोगों को देनी होगी जो देश के बाहर काम कर रहे हैं।
- ईरान के राजदूत अली मूसावी ने साफ किया है कि यह रास्ता केवल उन जहाजों के लिए खुला है जो ईरान के दुश्मन नहीं हैं।
- भारत, चीन, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देश अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए तेहरान से सीधी बातचीत कर रहे हैं।
- जहाजों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाना जरूरी होगा।
समुद्री व्यापार और ट्रैफिक पर क्या असर पड़ा?
फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए तनाव के बाद से इस रास्ते पर समुद्री ट्रैफिक में भारी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांजिट में 95 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई देशों के जहाज अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहे हैं या भारी जोखिम उठाकर वहां से निकल रहे हैं।
| विवरण | ताजा आंकड़े और जानकारी |
|---|---|
| ट्रैफिक में कमी | लगभग 95 प्रतिशत की गिरावट |
| ट्रांजिट फीस | एक टैंकर ने कथित तौर पर 2 मिलियन डॉलर का भुगतान किया |
| सुरक्षा उपाय | कुछ जहाजों ने अपना AIS सिस्टम बंद करके सफर किया |
| वार्ता में शामिल देश | भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक और मलेशिया |
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया सिस्टम कुछ समय के लिए समाधान दे सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आर्थिक रूप से काफी महंगा साबित होगा। शिपिंग कंपनियों को अब बीमा और सुरक्षा के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की संभावना है।
