ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा अपडेट आया है। ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) के प्रमुख Mohammad Eslami ने सांसदों को बताया कि देश के परमाणु केंद्रों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। उन्होंने साफ़ कर दिया कि यूरेनियम बढ़ाना ईरान के लिए बहुत ज़रूरी है और इस पर किसी भी तरह की बातचीत या समझौता नहीं होगा।

ईरान के परमाणु केंद्रों की सुरक्षा और यूरेनियम पर क्या फैसला हुआ है?

AEOI के प्रमुख Mohammad Eslami ने सांसदों को जानकारी दी कि सभी परमाणु केंद्रों और संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता Ebrahim Rezaei ने बताया कि ईरान अपने परमाणु उद्योग में शांतिपूर्ण काम जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम बढ़ाने का अधिकार ईरान के लिए एक लाल रेखा की तरह है जिसे पार नहीं किया जा सकता। ईरान के सांसदों ने यह बात भी कही कि Non-Proliferation Treaty (NPT) की सदस्यता ईरान के लिए बेअसर रही है।

IAEA और अंतरराष्ट्रीय जांच को लेकर क्या विवाद है?

International Atomic Energy Agency (IAEA) ने फरवरी 2026 की अपनी रिपोर्ट में बताया कि वह उन परमाणु केंद्रों की जांच नहीं कर पाया जो जून 2025 के सैन्य हमलों से प्रभावित हुए थे। IAEA का कहना है कि ईरान ने NPT समझौते के तहत ज़रूरी रिपोर्ट और एक्सेस नहीं दिया। वहीं, ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सितंबर 2025 में कहा था कि उनके परमाणु सामान की निगरानी हो रही है, लेकिन बाहरी हमलों की वजह से जांच के काम में कुछ समय के लिए रुकावट आई थी। IAEA के महानिदेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में भी शामिल रहे हैं ताकि परमाणु कार्यक्रम की जांच को आसान बनाया जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यूरेनियम बढ़ाने पर ईरान का क्या रुख है?

AEOI प्रमुख Mohammad Eslami और प्रवक्ता Ebrahim Rezaei ने साफ़ कहा है कि यूरेनियम बढ़ाना ईरान के लिए गैर-परक्राम्य है और यह उनके अधिकारों के लिए एक लाल रेखा है।

IAEA को परमाणु केंद्रों की जांच में क्या दिक्कत आ रही है?

IAEA ने बताया कि जून 2025 के सैन्य हमलों के बाद प्रभावित केंद्रों की स्थिति का पता नहीं चल सका क्योंकि ईरान ने ज़रूरी रिपोर्ट और एक्सेस उपलब्ध नहीं कराया।