ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने नई दिल्ली में BRICS मीटिंग के दौरान कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं चाहे और उनका प्रोग्राम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। इस मुलाकात में उन्होंने अमेरिका के साथ चल रहे विवाद और भारत के लिए चबहार पोर्ट की अहमियत पर भी बात की।
परमाणु हथियारों और अमेरिका के साथ विवाद का क्या है सच?
विदेश मंत्री Araghchi ने माना कि अमेरिका के साथ यूरेनियम के मुद्दे पर बातचीत अभी रुकी हुई है। उन्होंने इसे ‘डेडलॉक’ बताया और कहा कि यूरेनियम के भंडार और उसकी मात्रा को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
- अमेरिकी दावा: अमेरिका का मानना है कि ईरान के पास 60% शुद्धता वाला लगभग 400 से 450 किलोग्राम यूरेनियम है।
- रूस का प्रस्ताव: रूस ने ईरान के यूरेनियम को अपने पास स्टोर करने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर ईरान विचार कर रहा है।
- चीन की भूमिका: ईरान ने चीन को अपना रणनीतिक पार्टनर बताया और उनसे डिप्लोमेटिक मदद की उम्मीद जताई।
भारत के लिए Chabahar Port क्यों है ‘गोल्डन गेट’?
ईरान ने चबहार पोर्ट को भारत के लिए एक ‘सुनहरा दरवाज़ा’ बताया। Araghchi ने भारत से अपील की कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद इस पोर्ट में अपना निवेश जारी रखे, क्योंकि इससे भारत को मध्य एशिया और यूरोप तक पहुँच मिलेगी।
| मुख्य विवरण | जानकारी |
|---|---|
| संबंधित अनुबंध | मई 2024 में 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ |
| भारत का निवेश | करीब 120 मिलियन डॉलर के उपकरण लगाए गए |
| प्रतिबंध की स्थिति | 26 अप्रैल 2026 को US सेंक्शन वेवर खत्म हो गया |
भारत का विदेश मंत्रालय फिलहाल इस मुद्दे पर ईरान और अमेरिका दोनों से बातचीत कर रहा है।
खलीजी देशों की सुरक्षा और Strait of Hormuz पर क्या कहा?
विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान Strait of Hormuz से जहाजों के सुरक्षित आने-जाने के लिए पूरी तरह कमिटेड है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के प्रति अविश्वास ही डिप्लोमेसी के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भारत की अच्छी साख पूरे पर्शियन गल्फ क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाने में मदद कर सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर क्या विवाद है?
मुख्य विवाद यूरेनियम की मात्रा और उसकी शुद्धता को लेकर है। अमेरिका का कहना है कि ईरान के पास 60% शुद्धता वाला 400-450 किलो यूरेनियम है, जिस पर फिलहाल बातचीत रुकी हुई है।
चबहार पोर्ट को लेकर भारत के सामने क्या समस्या है?
अमेरिका ने 26 अप्रैल 2026 को वह छूट (waiver) खत्म कर दी है जिससे भारत चबहार पोर्ट का संचालन कर रहा था। अब भारत को निवेश जारी रखने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच तालमेल बिठाना होगा।
