ईरान और दुनिया के बड़े देशों के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान ने अपना पुराना परमाणु समझौता पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे अब उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई अंतरराष्ट्रीय पाबंदी नहीं रही। अमेरिका और इसराइल ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों पर हमले किए हैं, जिसके बाद अब ईरान दुनिया की परमाणु संधि (NPT) से भी बाहर निकलने की सोच रहा है।

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ईरान के परमाणु समझौते और मौजूदा विवाद का क्या कारण है?

ईरान ने अक्टूबर 2025 में JCPOA यानी अपने परमाणु समझौते को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया था। इस समझौते का मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित करना था, लेकिन 2018 में अमेरिका के बाहर होने के बाद यह कमजोर हो गया। अब ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई रोक नहीं है। मार्च 2026 में अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान के कई परमाणु ईंधन केंद्रों पर हमले किए, जिससे वहां काफी नुकसान हुआ। ईरान का कहना है कि उसके पास यूरेनियम समृद्ध करने का पूरा हक है।

परमाणु क्षमता और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की क्या रिपोर्ट है?

IAEA के चीफ राफेल ग्रॉसी के मुताबिक, ईरान के पास 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का बड़ा स्टॉक है। यह मात्रा इतनी है कि अगर इसे और बढ़ाया जाए, तो इससे करीब पांच परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। अमेरिका और इसराइल इसे एक बड़ा खतरा मान रहे हैं, जबकि ईरान का दावा है कि उसका प्रोग्राम केवल शांतिपूर्ण काम के लिए है। इस बीच, सऊदी अरब और खाड़ी देशों को डर है कि इससे पूरे इलाके में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है।

परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां

तारीख/संस्था मुख्य घटना या जानकारी
अक्टूबर 2025 ईरान ने JCPOA परमाणु समझौता खत्म किया
मार्च 2026 अमेरिका और इसराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया
अप्रैल 2026 ईरान ने NPT संधि छोड़ने पर विचार शुरू किया
राफेल ग्रॉसी (IAEA) ईरान के पास 200 किलो से ज्यादा 60% यूरेनियम मौजूद है
नवंबर 2024 अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने कहा ईरान बम बनाने की स्थिति में है
27 अप्रैल 2026 न्यूयॉर्क में NPT की रिव्यू कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी
दिसंबर 2020 ईरान ने परमाणु कार्यक्रम बढ़ाने वाला कानून पास किया