ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका के साथ आखिरी समझौता नहीं हो जाता, तब तक उसके परमाणु कार्यक्रम की स्थिति वैसी ही रहेगी। इस बीच, दोनों देशों के बीच होने वाली अहम बातचीत को फिलहाल टाल दिया गया है।

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अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शुरुआती समझौता

17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक 14 पॉइंट के समझौते (MOU) पर साइन किए थे। इस समझौते का मकसद युद्ध को खत्म करना, युद्धविराम को बढ़ाना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना था। दोनों देशों ने तय किया कि वे अगले 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने पर एक फाइनल डील करेंगे।

बातचीत में देरी की वजह

स्विट्जरलैंड में अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच होने वाली मीटिंग को टाल दिया गया है। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने इस देरी की पुष्टि की है। इसी वजह से अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की स्विट्जरलैंड यात्रा भी आगे बढ़ गई है। खबरों के मुताबिक, लेबनान में इसराइल के सैन्य हमलों की वजह से ईरान के प्रतिनिधि अपनी यात्रा टाल रहे हैं। ईरान ने मांग की है कि लेबनान में लड़ाई पूरी तरह बंद हो।

समझौते के बाद अब तक क्या हुआ

इस शुरुआती डील के बाद कुछ बड़े कदम उठाए गए हैं:

  • अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी (naval blockade) हटा ली है।
  • ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए 60 दिनों तक टोल टैक्स नहीं लेने का फैसला किया है।
  • जहाजों को अब नए ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ से इजाजत लेनी होगी।
  • अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर कुछ समय के लिए राहत दी है।

परमाणु कार्यक्रम पर क्या है स्टैंड

ईरान ने कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने परमाणु कार्यक्रम की तरक्की को फिलहाल रोक देगा। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अपने परमाणु संवर्धन (nuclear enrichment) को पांच साल तक रोकने के लिए तैयार है। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा है कि ईरान के वादे पूरी तरह से जाँचे जाने चाहिए ताकि वह कभी परमाणु हथियार न बना सके।

ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने कहा कि ट्रंप ने यह डील मजबूरी में साइन की है और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत इतनी आसान नहीं होगी।