ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ी बातचीत चल रही है। ईरान ने अपनी परमाणु साइटों की जांच के लिए इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को वापस बुलाने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ़ किया है कि परमाणु केंद्रों की जांच की अनुमति पूरी तरह से चल रही बातचीत और उसके नतीजों पर निर्भर करेगी।

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इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और उपराष्ट्रपति JD Vance की अहम भूमिका है। JD Vance ने 16 जून 2026 को पुष्टि की थी कि दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते के तहत परमाणु निरीक्षकों की वापसी ज़रूर होगी। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba ने भी अमेरिका के साथ सीधी बातचीत का समर्थन किया है, जिससे यह डील संभव हो सकी।

दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार किया गया है। इस MoU के तहत 60 दिनों का समय तय किया गया है ताकि परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला लिया जा सके। इस समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूरी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, निरीक्षकों की वापसी को व्यवस्थित करने के लिए तेहरान और IAEA के बीच एक अलग साइड लेटर भी तैयार किया गया है।

इस समझौते की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • यूरेनियम की मात्रा: ईरान को अपने पास मौजूद अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को कम करना होगा, जिसकी निगरानी IAEA करेगा।
  • निरीक्षण: अमेरिकी दूत Steve Witkoff के अनुसार, ईरान IAEA को अपनी परमाणु साइटों की जांच और समृद्ध सामग्री की पहचान करने के लिए आमंत्रित करेगा।
  • मध्यस्थता: ईरान ने अमेरिका के साथ रुकी हुई परमाणु बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए सऊदी अरब से मदद मांगी थी।
  • अन्य देश: फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देश भी ईरान के साथ राजनयिक रास्ते फिर से खोलने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले इसराइल के हमलों की वजह से ईरान में कई निरीक्षण रुक गए थे, जिन्हें अब बातचीत के ज़रिए दोबारा शुरू करने की कोशिश की जा रही है।