ईरान ने हाल ही में हुए भारी सैन्य हमलों के बाद एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ईरान के तबाह हो चुके परमाणु केंद्रों के मलबे के नीचे दबी सामग्री को अब इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की निगरानी में सुरक्षित निकाला जाएगा। इस कदम को तनाव कम करने और कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू होने की दिशा में एक पहल माना जा रहा है।

मलबे में कितनी परमाणु सामग्री दबी है

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास अभी भी लगभग 440 से 460 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है, जो 60% तक संवर्धित है। यह सामग्री मुख्य रूप से इस्फ़हान जैसे अंडरग्राउंड परिसरों में रखी गई है, जो हाल ही में हुए भारी बमबारी से बच गए थे। इस हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया था जिसमें अमेरिका और इजरायल शामिल थे।

  • क्षतिग्रस्त साइट्स पर जांच के लिए ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से अनुमति लेनी होगी।
  • मलबे में मौजूद यूरेनियम और अन्य गैस को सुरक्षित निकालने के दौरान IAEA की टीम वहां मौजूद रहेगी।
  • यह निगरानी इसलिए रखी जाएगी ताकि परमाणु सामग्री का कोई गलत इस्तेमाल न हो सके और सुरक्षा बनी रहे।

क्या आस-पास के देशों में रेडिएशन का खतरा है

हमलों के बाद से ही परमाणु रेडिएशन फैलने को लेकर चिंता जताई जा रही थी। हालांकि, IAEA ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ईरान से सटे किसी भी देश में रेडिएशन का स्तर नहीं बढ़ा है। एजेंसी का इमरजेंसी सेंटर लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

  • IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने सभी पक्षों से कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू करने की अपील की है।
  • एजेंसी ने क्षतिग्रस्त साइट्स की जांच और सुरक्षा के लिए अपनी तकनीकी टीम भेजने की भी बात कही है।
  • रेडिएशन लीक होने की स्थिति में लोगों को वहां से सुरक्षित निकालने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन अभी ऐसा कोई अलर्ट नहीं है।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.