ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने अपने भारी जल केंद्र पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका और इसराइल ने मिलकर किया है और यह विज्ञान और पूरी इंसानियत के खिलाफ एक बड़ा जुर्म है। पिछले कुछ दिनों से ईरान के परमाणु और पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं। इन हमलों की वजह से पूरे इलाके में रेडियोधर्मी कचरा फैलने का डर पैदा हो गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।

किस जगह हुआ है हमला और कितना है नुकसान?

ईरान के अराक शहर में स्थित खोंडाब भारी जल प्लांट को इस हमले में काफी नुकसान पहुँचा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने साफ किया है कि यह प्लांट अब काम करने की हालत में नहीं रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने भी चेतावनी दी है कि परमाणु ठिकानों पर ऐसे हमले बहुत बड़ा हादसा करवा सकते हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ईरान के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर इस खतरे के बारे में जानकारी दी है और तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

हमलों की मुख्य जानकारी और तारीखें

पिछले कुछ हफ्तों में ईरान के अलग-अलग परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों की पूरी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:

तारीख घटना की मुख्य जानकारी
6 अप्रैल 2026 ईरान ने हमले की निंदा की और तेहरान में स्ट्राइक की वजह से 13 लोगों की जान गई।
5 अप्रैल 2026 डब्ल्यूएचओ ने बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा को लेकर खतरे की घंटी बजाई।
4 अप्रैल 2026 ईरान के विदेश मंत्री ने परमाणु कचरे से होने वाले प्रदूषण की चेतावनी जारी की।
3 अप्रैल 2026 पुष्टि हुई कि अराक का भारी जल प्लांट हमलों के कारण अब चालू नहीं है।
27 मार्च 2026 अमेरिका और इसराइल ने मिलकर अराक और यज़्द के ठिकानों पर बमबारी की।
28 फरवरी 2026 ईरान के बुशेहर प्लांट पर पहला हमला हुआ जिससे तनाव काफी बढ़ गया।

क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय नियम और सुरक्षा कानून?

किसी भी देश के शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के खिलाफ माना जाता है। ईरान ने कहा है कि ये ठिकाने पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में थे और इन पर हमला करना एक युद्ध अपराध है। इस तरह की हरकतों से परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की वैश्विक कोशिशों को भारी नुकसान पहुँचता है। ईरान अब इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालतों और मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है ताकि परमाणु केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.