ईरान में 21 मार्च 2026 को तनाव काफी बढ़ गया जब नतांज (Natanz) स्थित परमाणु संवर्धन केंद्र और रामसर (Ramsar) शहर समेत कई इलाकों में हवाई हमले हुए। ईरान की आधिकारिक न्यूज एजेंसी मिजान के अनुसार, नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला हुआ है लेकिन राहत की बात यह है कि वहां से किसी भी तरह के रेडिएशन लीक की खबर नहीं है। इन हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

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ईरान के नतांज और अन्य शहरों में हुए हमलों का विवरण

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने नतांज पर हुए हमले को अमेरिका और इजरायल का साझा ऑपरेशन बताया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने सैन्य संयम बरतने की अपील की है ताकि किसी परमाणु दुर्घटना से बचा जा सके।

  • नतांज हमला: न्यूक्लियर प्लांट पर हमला हुआ, लेकिन टेक्निकल टीम ने पुष्टि की है कि कोई रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ।
  • रामसर में मौतें: रामसर शहर में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में एक परिवार के तीन लोगों की जान चली गई।
  • IRGC प्रवक्ता की मौत: अमेरिकी और इजरायली हमलों में IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी के मारे जाने की खबर है।
  • रूस की प्रतिक्रिया: रूस के विदेश मंत्रालय ने नतांज हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

UAE के लिए चेतावनी और इजरायल पर जवाबी हमला

ईरान की ओर से जारी बयान में पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी गई है। IRGC ने Ras al-Khaimah शहर के निवासियों को इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही इजरायल के डिमोना (Dimona) इलाके में ईरानी मिसाइल गिरने से करीब 20 लोग घायल हुए हैं।

देश/संस्था मुख्य अपडेट और घटना
UAE Ras al-Khaimah को खाली करने की IRGC की धमकी।
इजरायल डिमोना में मिसाइल हमला, 20 लोग घायल, सैन्य हमले बढ़ाने की चेतावनी।
IAEA परमाणु केंद्र पर नजर, फिलहाल रेडिएशन का कोई खतरा नहीं।
अमेरिका ट्रंप का सैन्य अभियान कम करने का संकेत, लेकिन अतिरिक्त मरीन भेजे गए।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने चेतावनी दी है कि 22 मार्च 2026 से ईरान के खिलाफ हमलों की तीव्रता और बढ़ाई जाएगी। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने हमलों को तुरंत रोकने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोबारा न होने की गारंटी मांगी है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि युद्ध का दायरा बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।