ईरान ने दावा किया है कि 19 जुलाई 2026 को अमेरिका ने उसके Karun Nuclear Power Plant, जिसे Darkhoveyn के नाम से भी जाना जाता है, पर मिसाइल से हमला किया है। ईरान सरकार ने इसे अपने शांतिपूर्ण परमाणु बुनियादी ढांचे पर एक खतरनाक हमला बताया है। ईरान का कहना है कि जून 2025 से अब तक उसके परमाणु केंद्रों पर यह 18वां हमला है, जिसके लिए उसने अमेरिका और इसराइल को जिम्मेदार ठहराया है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद ईरान के उपराष्ट्रपति और Atomic Energy Organization of Iran के प्रमुख ने IAEA के महानिदेशक Rafael Grossi को औपचारिक रूप से पत्र लिखा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने IAEA से इस हमले की स्पष्ट निंदा करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस मामले में चुप रहती हैं, तो यह परमाणु सुविधाओं पर हमलों को सामान्य बना देगा।
तनाव बढ़ने की चेतावनी
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि वाशिंगटन इस हमले के बाद क्षेत्र में फैलने वाली असुरक्षा और अस्थिरता के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। वहीं, रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने भी इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरान का कहना है कि यह हमला सीधे तौर पर नागरिक बुनियादी ढांचे और मानवीय सुरक्षा को निशाना बनाता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े खतरे की स्थिति पैदा हो गई है।
