ईरान के Bushehr परमाणु प्लांट के पास अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की खबरों के बाद अब IAEA इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। दुनिया भर में तनाव बढ़ गया है क्योंकि परमाणु प्लांट जैसे संवेदनशील इलाकों के पास हमले होने से बड़ी दुर्घटना का खतरा रहता है। IAEA के प्रमुख ने इस तरह के हमलों को पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य बताया है।
IAEA ने जताई चिंता
IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने 10 जुलाई 2026 को बताया कि एजेंसी इस समय हालात की निगरानी कर रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी तक प्लांट पर सीधे किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे केंद्रों पर हमला करना बहुत खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सभी देशों से संयम बरतने की अपील की है।
ईरान का दावा और नुकसान की जानकारी
ईरान के Bushehr प्रांत के डिप्टी गवर्नर Ehsan Jahanian ने 9 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि अमेरिकी हमलों में परमाणु प्लांट के बाहरी इलाके, Choghadak में एक सैन्य बेस और एक फिशिंग पियर को निशाना बनाया गया। ईरान के Atomic Energy Organization ने पुष्टि की है कि इस हमले में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है और रिएक्टर या उसके सिस्टम को कोई चोट नहीं पहुंची है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और युद्ध अपराध बताया है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिका की ओर से मिली जानकारी में विरोधाभास दिखा। जहां 10 जुलाई को एक अमेरिकी अधिकारी ने ईरान में हमलों से इनकार किया, वहीं यह भी कन्फर्म किया कि 9 जुलाई को ईरान के सैन्य ठिकानों पर करीब 90 हमले किए गए। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया था। इससे पहले 7 और 8 जुलाई को भी कुछ सैन्य ऑपरेशन चलाए गए थे।
तनाव की मुख्य वजह
अमेरिका ने इन हमलों को Strait of Hormuz में अपने व्यापारिक जहाजों पर हुए ईरानी हमलों का जवाब बताया है। इन ताजा घटनाओं की वजह से जून 2026 में हुआ कमजोर युद्धविराम (ceasefire) अब खतरे में है।
ताजा अपडेट के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 तक Bushehr परमाणु प्लांट में कामकाज फिर से शुरू हो गया है और कर्मचारी वापस लौट आए हैं। इसी बीच ईरान अपने सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के अंतिम संस्कार की तैयारी भी कर रहा है।
