ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर एक बार फिर संदिग्ध हलचल देखी गई है। सैटेलाइट से मिली नई तस्वीरों में वहां मरम्मत का काम और गाड़ियों की भारी आवाजाही नजर आई है। इस खबर के बाद दुनिया भर में तनाव बढ़ गया है क्योंकि यह ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को हुए समझौते (MOU) के खिलाफ हो सकता है।
CNN और Institute for Science and International Security ने बताया कि जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में Parchin मिलिट्री कॉम्प्लेक्स के Taleghan 2 इलाके में निर्माण कार्य हुआ। यहाँ पुरानी टूट-फूट को ठीक करने और कंक्रीट की छत बनाने का काम चल रहा था। इसके अलावा, Pickaxe Mountain नाम की गहरी जगह पर भी निर्माण कार्य जारी मिला, जिसे पश्चिमी देश यूरेनियम संवर्धन प्लांट मानते हैं। हालांकि, Fordow, Natanz और Isfahan जैसी अन्य बड़ी साइट्स पर कोई खास हलचल नहीं दिखी।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। यूरोपीय संघ के राजदूत Stavros Lambrinidis ने कहा कि IAEA ईरान के परमाणु सामान की जांच नहीं कर पाया है क्योंकि ईरान ने सहयोग नहीं किया। संयुक्त राष्ट्र की Rosemary DiCarlo ने भी मामले को शांति से सुलझाने की बात कही। वहीं, अमेरिका की Tammy Bruce ने कहा कि राजनयिक समाधान की कोशिश जारी रहेगी, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरा हुआ तो ईरान को जवाब देना होगा। राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों को आतंकवाद बताया।
ब्रिटेन ने भी इस मामले में तनाव कम करने और IAEA के साथ पूरा सहयोग करने की मांग की है। दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohammad Bagher Zolghadr ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो वह इसका करारा जवाब देगा। ईरान के संसदीय अधिकारियों ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने फिर से बड़ा हमला किया, तो वे अपनी परमाणु नीति बदल सकते हैं।
इस बीच, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कहा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे। वहीं, रूस की सरकारी परमाणु कंपनी ने ईरान के Bushehr प्लांट में अपने छह कर्मचारियों को फिर से तैनात करना शुरू कर दिया है। फिलहाल, ईरान ने IAEA को अपने संवर्धन साइट्स पर जाने से रोक रखा है, जिससे यूरेनियम के स्टॉक की जांच करना मुश्किल हो गया है।
