ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर बहुत कड़े कदम उठाए हैं। खबर है कि ईरान ने अपनी संवेदनशील परमाणु सामग्री को बचाने के लिए कई सुरंगों को जानबूझकर गिरा दिया है और वहां विस्फोटक लगा दिए हैं। एक तरफ जहां सुरक्षा बढ़ाई गई है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरें भी आ रही हैं।
परमाणु साइटों की सुरक्षा और सुरंगों को गिराना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने परमाणु भंडार को सुरक्षित करने के लिए Isfahan न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में सुरंगों को बंद कर दिया है। इन जगहों पर विस्फोटक माइन्स लगाए गए हैं ताकि अगर कोई बाहरी ताकत इन सामग्रियों को जब्त करने या नष्ट करने की कोशिश करे, तो उसमें काफी मुश्किल आए। यह कदम अमेरिकी सेना की किसी भी संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए उठाया गया है।
शांति समझौते पर पाकिस्तान की मध्यस्थता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 13 जून 2026 को ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो गया है। उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटों के भीतर इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर हो सकते हैं और अगले हफ्ते तकनीकी बातचीत शुरू होगी।
समझौते की शर्तों पर विवाद
शांति समझौते को लेकर दोनों देशों की बातों में अंतर है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 12 जून को कहा कि समझौते के तहत ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम को मौके पर ही नष्ट करना होगा और परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर जांच की अनुमति देनी होगी। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और ईरानी मीडिया का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन का उनका अधिकार बना रहेगा। फिलहाल 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान इन शर्तों पर आगे चर्चा होगी।
IAEA की चिंता और अंतरराष्ट्रीय दबाव
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने 8 जून 2026 को कहा कि ईरान के साथ उनका संपर्क टूट गया है। 10 जून को IAEA बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया जिसमें ईरान से मांग की गई कि वह अपने करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम भंडार की पूरी जानकारी दे और जांचकर्ताओं को साइट्स तक पहुंचने दे।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव
सैन्य हलचल के बीच 12 जून की रात को अमेरिका के CENTCOM ने जानकारी दी कि उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने वाले कई ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। इससे इस इलाके में तनाव और बढ़ गया है।