International Atomic Energy Agency (IAEA) ने एक बड़ा दावा किया है। एजेंसी ने कहा कि उसे पता है कि ईरान ने अपना हाईली एनरिच्ड यूरेनियम कहाँ रखा है। हालांकि, IAEA का कहना है कि जब तक ईरान खुद इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं देता, तब तक पूरी पारदर्शिता नहीं आएगी।

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IAEA के चीफ राफेल ग्रोसी (Rafael Grossi) ने बार-बार कहा है कि ईरान को परमाणु समझौतों का पालन करना होगा। जून 2025 में ईरान के कई परमाणु केंद्रों जैसे Natanz, Fordow और Esfahan पर हमले हुए थे। इन हमलों में ज़मीन के अंदर घुसने वाले बमों का इस्तेमाल हुआ था, जिससे वहां की मशीनें और बिजली के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा था।

सबसे बड़ी चिंता यूरेनियम के स्टॉक को लेकर है। जून 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 440.9 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम है जिसे 60% तक एनरिच किया गया है। जानकारों का कहना है कि इतने यूरेनियम से करीब 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं, जो किसी भी आम नागरिक ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है।

दबाव इतना बढ़ गया है कि जून 2026 में IAEA के बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान से अपने यूरेनियम का पूरा हिसाब माँगने की बात कही। वहीं रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर डील नहीं हुई तो वे इस यूरेनियम को जबरन कब्ज़े में ले सकते हैं या इसे नष्ट कर देंगे।

इसके अलावा, Varamin और Marivan जैसी कुछ ऐसी जगहें भी मिली हैं जिनके बारे में ईरान ने पहले नहीं बताया था। वहाँ यूरेनियम के कण मिले हैं, जिस पर IAEA अब भी जवाब माँग रहा है। ईरान का कहना है कि यूरेनियम बनाना उसका कानूनी हक है और वह इसका इस्तेमाल सिर्फ शांति के लिए कर रहा है।