ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर में बड़ी हलचल मची हुई है। MIT के प्रोफेसर टेड पोस्टोल ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास इतना यूरेनियम मौजूद है जिससे वह बहुत जल्द परमाणु हथियार बना सकता है। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन यूरेनियम के मालिकाना हक को लेकर दोनों देशों के बीच तगड़ी खींचतान चल रही है।

ईरान कितने समय में बना सकता है परमाणु बम?

MIT के प्रोफेसर टेड पोस्टोल के मुताबिक ईरान के पास 60% समृद्ध (enriched) यूरेनियम का 440 किलो स्टॉक है। यह मात्रा इतनी है कि अगर इसे 90% तक बढ़ा दिया जाए, तो ईरान 10 से 11 परमाणु बम बना सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 60% से 90% तक की यह प्रक्रिया ईरान के आधुनिक IR-6 सेंट्रीफ्यूज की मदद से मात्र 4 से 5 हफ़्तों में पूरी की जा सकती है। प्रोफेसर पोस्टोल ने यह भी बताया कि हथियारों को जोड़ने का काम छोटे और गुप्त भूमिगत ठिकानों पर किया जा सकता है, जिसके लिए पहले से टेस्टिंग की ज़रूरत भी नहीं होगी।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या डील चल रही है?

  • सीजफायर की अवधि: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल 2026 को ईरान के साथ दो हफ़्तों के लिए सीजफायर को आगे बढ़ा दिया है।
  • बातचीत का स्थान: दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर पाकिस्तान के इस्लामाबाद शहर में होने वाला है।
  • ट्रंप की मांग: डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपना सारा 440 किलो यूरेनियम अमेरिका या किसी तीसरे देश को सौंप दे और परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए बंद कर दे।
  • लालच और ऑफर: अमेरिका ने ईरान को लालच दिया है कि अगर वह परमाणु हथियार बनाने का रास्ता छोड़ता है, तो उसके 20 अरब डॉलर के फ्रीज किए हुए एसेट्स वापस किए जा सकते हैं।
  • ईरान का प्लान: ईरान ने “10+10” प्लान का प्रस्ताव दिया है, जिसमें वह 10 साल तक यूरेनियम बढ़ाना बंद करेगा और अगले 10 साल तक बहुत कम मात्रा में इसे बढ़ाने की अनुमति मांगेगा।

IAEA और दुनिया की क्या चिंताएं हैं?

परमाणु एजेंसी IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक नई परमाणु हथियारों की दौड़ की तरफ बढ़ रही है। जून 2025 में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को अपने ठिकानों तक जाने से रोक रखा है। एजेंसी का कहना है कि बिना जांच के किसी भी समझौते का कोई मतलब नहीं होगा क्योंकि उन्हें यह नहीं पता कि असल में वहां क्या चल रहा है। फिलहाल अमेरिका ईरान पर 20 साल तक यूरेनियम रोकने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान सिर्फ 5 साल की समय सीमा चाहता है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.