ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए तेल प्रतिबंध अब उन पर कोई असर नहीं डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईरान अब अपना कच्चा तेल 20 प्रतिशत ज़्यादा दाम पर बेच रहा है। हालांकि, एक तरफ जहाँ व्यापार की बात हो रही है, वहीं अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
तेल बिक्री और अमेरिकी छूट
अमेरिका ने 23 जून 2026 को एक विशेष छूट जारी की थी, जिसे ‘जनरल लाइसेंस X’ कहा जा रहा है। यह छूट 21 अगस्त 2026 तक मान्य है, जिसके तहत ईरान अब डॉलर में कच्चा तेल, पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकता है। इस फैसले से ईरान के तेल प्रतिबंधों में बड़ी ढील मिली है। साथ ही, एक समझौते के तहत अमेरिका ईरान की 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति को वापस करने पर भी सहमत हुआ है।
बढ़ता सैन्य तनाव और हमले
व्यापारिक बातचीत के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य झड़पें भी हुई हैं। 27 जून 2026 को अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका का कहना था कि ईरान ने किकु (Kiku) नाम के एक पैनमा टैंकर पर हमला किया था, जिसमें 20 लाख बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल था। इसके जवाब में अमेरिका ने कार्रवाई की। 29 जून को भी दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव जारी रहा, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर उनका नियंत्रण है और वे वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, एक अंतरिम समझौते के तहत इस समुद्री रास्ते को व्यावसायिक जहाजों के लिए खोला गया था, लेकिन हालिया झड़पों ने फिर से चिंता बढ़ा दी है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कच्चे तेल पर मुनाफा | 20% मार्कअप |
| ब्रेंट क्रूड (Brent) भाव | 72.20 डॉलर प्रति बैरल |
| WTI क्रूड भाव | 70.09 डॉलर प्रति बैरल |
| वापस मिलने वाली संपत्ति | 25 अरब डॉलर |
| लाइसेंस की वैधता | 21 अगस्त 2026 तक |
