Iran Oil Crisis: अमेरिका ने किया ईरान का दम घोंट दिया, तेल के कुएं बंद हो सकते हैं, स्टोरेज फुल होने से मचा हड़कंप

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब तेल के कुओं तक पहुंच गया है। अमेरिका की सख्त नाकेबंदी की वजह से ईरान अपने कच्चे तेल को स्टोर नहीं कर पा रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब ईरान को अपने तेल के कुएं बंद करने पड़ सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया के तेल बाजार और सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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ईरान में तेल स्टोरेज का क्या हाल है और अमेरिका का क्या कहना है?

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान के मुख्य तेल केंद्र Kharg Island पर स्टोरेज लगभग भर चुका है। अमेरिकी Treasury Secretary Scott Bessent ने बताया कि कुछ ही दिनों में स्टोरेज की जगह खत्म हो जाएगी और ईरान को अपने तेल के कुओं को बंद करना होगा। राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि इस नाकेबंदी की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह घुट रही है और उसे हर दिन 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि Kharg Island पर करीब 13 मिलियन बैरल तेल रखने की जगह बची है, जो अगले 12 से 13 दिनों में भर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो कुओं को नुकसान से बचाने के लिए ईरान को उनका उत्पादन रोकना पड़ेगा।

संकट से बचने के लिए ईरान ने क्या कदम उठाए?

स्टोरेज की भारी कमी को देखते हुए ईरान ने 30 साल पुराने एक सुपरटैंकर M/T Nasha को फिर से चालू किया है। इस पुराने जहाज का इस्तेमाल अब तैरते हुए स्टोरेज के तौर पर किया जाएगा ताकि कच्चे तेल को जमीन के बजाय जहाज में रखा जा सके। ईरान यह कोशिश कर रहा है कि किसी भी तरह तेल का उत्पादन बंद न हो।

इस बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरानी गनबोट्स ने Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर हमला किया और उनमें से एक को जब्त कर लिया। जवाब में अमेरिका ने अपनी तीसरी एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ईरान के पास तैनात कर दिया है और नेवी को निर्देश दिए हैं कि जो भी जहाज बारूदी सुरंगें बिछाए, उसे ढेर कर दिया जाए।

क्या बातचीत से सुलझेगा यह विवाद?

तनाव के बीच डिप्लोमेसी की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Aragachi पाकिस्तान, ओमान और रूस की यात्रा पर जा रहे हैं। ईरान के UN एम्बेसडर Amir Saeid Iravani ने कहा है कि अगर अमेरिका Strait of Hormuz से अपनी नाकेबंदी हटाता है, तभी पाकिस्तान में शांति वार्ता शुरू की जा सकती है।

दूसरी तरफ, अमेरिका के UN एम्बेसडर Mike Waltz ने साफ किया है कि अमेरिका ईरान पर भरोसा नहीं करेगा और कोई भी डील तभी होगी जब वह पूरी तरह से जांची जा सके। अमेरिका फिलहाल ईरान की अर्थव्यवस्था पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति अपना रहा है।