अमेरिका की घेराबंदी की वजह से ईरान के तेल टैंकर चाबहार पोर्ट के बाहर फंस गए हैं। खबर है कि वहां करीब 10 जहाज कतार में खड़े हैं और तेल बाहर नहीं जा पा रहा है। इस पूरे मामले में भारत भी शामिल है क्योंकि चाबहार पोर्ट में भारत का बड़ा हित है और अब वहां नियमों में बदलाव आया है।

चाबहार पोर्ट पर तेल टैंकर क्यों फंसे हैं?

अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी लागू कर दी थी। इसके बाद 26 अप्रैल 2026 को चाबहार पोर्ट के लिए दी गई अमेरिकी छूट भी खत्म हो गई। इस वजह से ईरान के तेल जहाजों का वहां जमावड़ा बढ़ गया है।

  • जहाजों की संख्या: अलग-अलग रिपोर्ट के मुताबिक यहां 6 से 10 तेल टैंकर खड़े हैं।
  • जहाजों का प्रकार: इनमें से ज़्यादातर बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) और कुछ सुएज़मैक्स जहाज हैं।
  • ट्रैकिंग का तरीका: कई जहाज पकड़े जाने से बचने के लिए अपना AIS ट्रांसमिशन बंद करके ‘डार्क’ तरीके से काम कर रहे हैं।

भारत और अमेरिका का इस पर क्या कहना है?

भारत इस मामले में काफी सतर्क है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अप्रैल 2026 को बताया कि चाबहार पोर्ट और खत्म हुई छूट के मुद्दे पर ईरान और अमेरिका दोनों के साथ चर्चा चल रही है। प्रतिबंधों के खतरे को कम करने के लिए भारत अपने शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल की हिस्सेदारी किसी ईरानी कंपनी को देने पर विचार कर रहा है।

दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की है ताकि ईरान द्वारा घेराबंदी हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की जा सके। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा भी किया कि ईरान की स्थिति खराब है और उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग की है।

ईरान की क्या प्रतिक्रिया रही?

ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को पूरी तरह गैरकानूनी बताया है और इसे समुद्री डकैती करार दिया है। ईरान का कहना है कि अब अमेरिका उसकी नीतियों को तय नहीं कर सकता। हालांकि, इस घेराबंदी की वजह से ईरान के तेल निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ गई है और वहां तेल जमा करने की जगह कम होती जा रही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

चाबहार पोर्ट पर कितने जहाज फंसे हुए हैं?

रिपोर्ट्स के अनुसार वहां 6 से 10 तेल टैंकर फंसे हुए हैं, जिनमें ज़्यादातर बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) जहाज शामिल हैं।

भारत इस समस्या से बचने के लिए क्या कदम उठा रहा है?

भारत सरकार ईरान और अमेरिका दोनों से बात कर रही है और अपने शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का हिस्सा किसी ईरानी कंपनी को देने पर विचार कर रही है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.