Hormuz Strait में तनाव बहुत बढ़ गया है और अब ईरान और ओमान जहाजों की आवाजाही के लिए 60 दिन के एक ट्रैफिक प्लान पर चर्चा कर रहे हैं। इस बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक कार्गो जहाज पर हमला कर दिया है जिससे इलाके में डर का माहौल है। इस विवाद की वजह से समुद्र के रास्ते सामान ले जाने वाले जहाजों और उनके क्रू के लिए खतरा बढ़ गया है।

जहाज पर हमला और IMO का फैसला

26 जून 2026 को ओमान के तट के पास ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक कार्गो जहाज पर हमला किया। इस हमले में जहाज के ऊपरी हिस्से (bridge) को नुकसान पहुँचा है लेकिन अच्छी बात यह रही कि किसी को चोट नहीं आई। इस घटना के बाद International Maritime Organization (IMO) के महासचिव Arsenio Dominguez ने फंसे हुए जहाजों को निकालने के प्लान पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि जब तक सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती तब तक निकासी प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।

रास्तों को लेकर विवाद और चेतावनी

ओमान ने IMO के साथ मिलकर जहाजों के लिए दो नए रास्ते (उत्तर और दक्षिण) तय किए थे ताकि जहाज सुरक्षित निकल सकें। लेकिन ईरान की IRGC ने इन रास्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो जहाज केवल उनके द्वारा तय किए गए रास्तों से जाएंगे उन्हें ही सुरक्षा और इंश्योरेंस मिलेगा। ईरान ने ओमान के बताए रास्तों को असुरक्षित बताया है।

60 दिन का फ्री पास और आगे की योजना

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले हफ्ते एक समझौता (MoU) हुआ था। इसके तहत ईरान ने कम से कम 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों को बिना किसी फीस के सुरक्षित रास्ता देने की बात मानी है। इस मुद्दे पर ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi और ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr Albusaidi ने फोन पर और मस्कट में मीटिंग की है। दोनों देशों ने एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है जो भविष्य में जहाजों के संचालन और खर्चों पर बात करेगा।

फीस को लेकर तकरार

जहाजों से पैसे लेने को लेकर दोनों देशों की राय अलग है। ओमान के विदेश मंत्री Badr Albusaidi ने साफ कहा है कि वे सुरक्षित रास्ते के लिए कोई फीस नहीं लेंगे। दूसरी तरफ ईरान के कुछ अधिकारियों ने इशारा किया है कि 60 दिन का समय खत्म होने के बाद वे ‘मैरीटाइम सर्विस फीस’ वसूल करेंगे। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने ईरान द्वारा फीस लेने के विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि खाड़ी देश ईरान के कंट्रोल में शिपिंग नहीं चाहते।

  • पुराने रास्तों पर बारूदी सुरंगें (mines) होने की वजह से वे अभी इस्तेमाल के लायक नहीं हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय कानून के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने का अधिकार सबको है और कोई भी देश अकेले फीस नहीं थोप सकता।