ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, Strait of Hormuz के प्रबंधन को लेकर एक बड़ी सहमति जताई है। अब ये दोनों देश मिलकर इस जलमार्ग की देखरेख करेंगे और यहाँ से गुजरने वाले जहाजों के लिए सर्विस चार्ज तय करेंगे। यह फैसला मस्कट में दोनों देशों के बड़े राजनयिकों के बीच हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद लिया गया है।
दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है। इस ग्रुप का मुख्य काम यह तय करना होगा कि भविष्य में जहाजों के आने-जाने का मैनेजमेंट कैसे होगा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से किन सेवाओं के लिए कितना पैसा लिया जाएगा। ईरान और ओमान ने साफ किया है कि उनके अपने समुद्री इलाकों पर उनका पूरा अधिकार रहेगा।
हालांकि, फीस को लेकर दोनों देशों की बातों में थोड़ा अंतर है। जहाँ ईरान ने ‘मैरीटाइम सर्विस फीस’ लगाने की बात कही है, वहीं ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसाइड ने सोशल मीडिया पर कहा कि जहाजों को बिना किसी टोल के सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।
यह पूरा मामला अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MOU) से जुड़ा हुआ है। इस समझौते के मुताबिक, अगले 60 दिनों तक कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, जिसके बाद फीस लागू होगी। ईरान को इस बारे में ओमान और खाड़ी के अन्य तटीय देशों से बात करने को कहा गया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा कि इस जलमार्ग का प्रबंधन तेहरान द्वारा किया जाएगा।
हाल ही में इस रास्ते को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन अमेरिका के साथ डील के बाद ईरान ने यह पाबंदी हटा ली है। अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नेवी के साथ तालमेल बिठाकर सीमित संख्या में जहाजों को रोजाना गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
इससे पहले मई 2026 में मस्कट में एक कानूनी-तकनीकी बैठक भी हुई थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव आर्सेनिओ डोमिंगुज़ भी शामिल थे। ईरान की नेवी ने यह भी साफ किया है कि उन्होंने इस जलमार्ग की ऑपरेशनल सीमाओं को अब और बढ़ा दिया है।
