ईरान और ओमान ने मस्कट में पहली बार एक जॉइंट कमेटी की बैठक की है। इस मीटिंग का मुख्य मकसद Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। दोनों देशों ने इस रणनीतिक रास्ते के मैनेजमेंट के लिए आपसी तालमेल बढ़ाने पर सहमति जताई है।
बैठक में किन बातों पर हुई चर्चा
यह पहली आधिकारिक बैठक 29 जून 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में हुई। इससे पहले 23 जून 2026 को दोनों देशों के बड़े अधिकारियों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके बाद इस विशेष कमेटी का गठन किया गया।
ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़ेम ग़रीबाबदी ने बताया कि इस मीटिंग में वर्तमान मुद्दों की समीक्षा की गई और आने वाले समय में इस समुद्री रास्ते को कैसे चलाया जाए, इस पर विचार किया गया। यह पूरी चर्चा इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आर्टिकल 5 के तहत हुई, जिसमें तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों (sovereign rights) पर ज़ोर दिया गया।
दोनों देशों ने एक साझा बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से Strait of Hormuz से जहाजों का आना-जाना सुरक्षित रहेगा। साथ ही, दोनों देश अपने समुद्री क्षेत्र पर अपना पूरा अधिकार बरकरार रखेंगे।
भविष्य के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा। यह ग्रुप जहाजों के आवागमन, मिलने वाली सुविधाओं और उनके खर्चों पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से नियम तय करेगा।
ईरान और ओमान ने यह भी कहा कि वे इस मामले में क्षेत्र के अन्य देशों से भी सलाह लेंगे। यह पूरी पहल ईरान और अमेरिका के बीच हुए एक समझौते का हिस्सा है, जिसमें ईरान ने ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर इस रास्ते के मैनेजमेंट पर काम करने का वादा किया था।
ओमान की तरफ से इस बैठक में विदेश मंत्रालय के एंबेसडर-एट-लार्ज अब्दुलअजीज अल-हिनाई शामिल हुए थे। दोनों देशों ने साफ किया कि Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला और सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है ताकि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
