Strait of Hormuz को लेकर ईरान और ओमान में हुआ समझौता, जहाजों की आवाजाही के लिए तैयार हुआ नया रूट

ईरान और ओमान ने फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले महत्वपूर्ण जलमार्ग Strait of Hormuz के नेविगेशन रूट को लेकर एक बड़ा समझौता किया है। 5 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने इस रास्ते की भौगोलिक स्थिति और संचालन के तरीके पर सहमति बना ली है। इस समझौते के तहत एक 60-दिवसीय ढांचा तैयार किया गया है, ताकि समुद्री जहाजों को आवाजाही में कोई परेशानी न हो।
समझौते का मुख्य विवरण और नया रूट
इस नई व्यवस्था के तहत, फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले व्यापारिक जहाज अब ईरानी क्षेत्रीय जलक्षेत्र (territorial waters) से होकर गुजरेंगे, जहां ईरान खुद आने वाले ट्रैफिक को कंट्रोल करेगा। इसके उलट, जो जहाज खाड़ी से बाहर निकलेंगे, वे ओमान के जलक्षेत्र का उपयोग करेंगे, जिसकी पूरी देखरेख ओमान की राजधानी मस्कट करेगी। यह जलमार्ग करीब 21 से 24 मील चौड़ा है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दुनिया का सबसे संवेदनशील रास्ता माना जाता है।
ट्रांजिट फीस और ईरान का स्टैंड
हार्मज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए पैसे लिए जाएंगे या नहीं, इस पर स्थिति अभी साफ नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने 2 अगस्त 2026 को कहा था कि ईरान नेविगेशन सेवाओं, पर्यावरण सुरक्षा और बीमा के लिए शुल्क लेने का अधिकार रखता है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जब तक ईरान सही नहीं समझेगा, तब तक जलमार्ग को बंद रखा जा सकता है। इसके विपरीत, ओमान के विदेश मंत्री Badr al-Busaidi ने जून 2026 में स्पष्ट किया था कि ओमान 'टोल-फ्री' यानी बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रास्ते के पक्ष में है।
अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 5 अगस्त 2026 को बयान देते हुए कहा कि इस सौदे को लेकर काफी प्रगति हुई है, जिसे अमेरिकी विदेश सचिव Marco Rubio ने भी दोहराया। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का रुख कुछ अलग है। एक अमेरिकी अधिकारी ने 4 अगस्त 2026 को साफ किया कि किसी भी अस्थायी रूट के लिए ईरान से मंजूरी या शुल्क लेने की प्रक्रिया मान्य नहीं होगी। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने भी जोर देकर कहा है कि दक्षिणी रास्ता पूरी तरह 'मुक्त और खुला' रहना चाहिए और इस पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। ईरान ने अपने आधिकारिक मीडिया के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि यह बातचीत पूरी तरह से दोनों देशों के बीच की है और इसमें अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है।