ईरान और ओमान अब मिलकर Strait of Hormuz के मैनेजमेंट के लिए एक नया तरीका निकालने जा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इस इलाके में तनाव बढ़ रहा है और अब जहाजों की आवाजाही को कंट्रोल करने के लिए एक नई बॉडी बनाई गई है, जिससे ग्लोबल ट्रेड पर असर पड़ सकता है।

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Persian Gulf Strait Authority क्या है और यह कैसे काम करेगी?

ईरान की Supreme National Security Council (SNSC) ने 18 मई 2026 को Persian Gulf Strait Authority (PGSA) नाम की एक नई संस्था बनाई है। इसका मुख्य काम Strait of Hormuz में होने वाले ऑपरेशन्स और बदलावों को संभालना होगा। यह संस्था अपने आधिकारिक X अकाउंट के जरिए रीयल-टाइम अपडेट देगी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि ओमान के साथ बातचीत जारी है ताकि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके और ईरान के अधिकारों की रक्षा हो। पिछले हफ्ते मस्कट में दोनों देशों के बीच एक्सपर्ट लेवल की मीटिंग भी हुई थी।

जहाजों से टोल वसूली और नए नियम क्या हैं?

ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए टोल वसूलना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब जहाजों को प्रति बैरल करीब एक डॉलर की फीस देनी होगी। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत में बयान दिया कि Strait of Hormuz सिर्फ ओमान और ईरान का रास्ता है और इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र नहीं है। ईरान का कहना है कि जो जहाज सहयोग करेंगे, उन्हें ही रास्ता दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका इस टोल वसूली और नाकेबंदी के फैसले का विरोध कर रहा है।

अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव का क्या असर होगा?

ईरान के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए विवाद की वजह से इस इलाके में अस्थिरता आई है। हालांकि 8 अप्रैल से एक कमजोर सीजफायर चल रहा है, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान की मदद से ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है। अमेरिका ने हाल ही में संघर्ष खत्म करने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिस पर ईरान ने अपना जवाब दे दिया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्थिति से जहाजों के ट्रांजिट में रिस्क बढ़ गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz में नया क्या बदलाव हुआ है?

ईरान ने PGSA नाम की संस्था बनाई है और ओमान के साथ मिलकर इसे मैनेज करने का फैसला किया है, जिसके तहत अब जहाजों से टोल फीस ली जाएगी।

क्या इस फैसले से समुद्री व्यापार पर असर पड़ेगा?

हां, मार्केट एनालिसिस के मुताबिक रिस्क बढ़ गया है क्योंकि ईरान अब प्रति बैरल एक डॉलर की फीस मांग रहा है, जिसका अमेरिका कड़ा विरोध कर रहा है।