ओमान और ईरान के बीच हुआ बड़ा समझौता, हॉर्मूज जलडमरूमध्य के कॉमर्शियल ट्रैफिक से होगी कमाई.

ईरान और ओमान ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कॉमर्शियल जहाजों से होने वाली कमाई को आपस में बांटने का बड़ा फैसला किया है। 26 अगस्त 2026 को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने इस बात की आधिकारिक घोषणा की। इस नए समझौते के बाद अब दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार और उससे जुड़े मामलों को लेकर पुरानी बातचीत एक पक्के और व्यवस्थित ढांचे में बदल गई है। इस इलाके से सफर करने वाले लोगों और व्यापार से जुड़े कारोबारियों के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
तेहरान में पास हुआ नया ड्राफ्ट प्लान
यह ऐलान तेहरान में चल रही विधाई गतिविधियों के ठीक बाद सामने आया है। नेशनल सिक्योरिटी एंड फॉरेन पॉलिसी कमीशन ने 23 अगस्त 2026 को एक ड्राफ्ट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान को मंजूरी दी थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशी कॉमर्शियल जहाजों से अलग-अलग सेवाओं के लिए चार्ज वसूलना है, हालांकि अभी इसे संसद की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इससे पहले सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने साफ किया था कि इस जलमार्ग को जब भी खोला जाएगा, उसे तेहरान द्वारा संचालित किया जाएगा और उस पर ट्रांजिट फीस भी लगाई जाएगी।
केवल कॉमर्शियल जहाजों के लिए लागू होगा नियम
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने यह स्पष्ट किया है कि यह रेवेन्यू-शेयरिंग समझौता केवल कॉमर्शियल जहाजों यानी व्यापारिक नौकाओं के लिए ही लागू होगा। ग़रीबाबादी ने यह भी कहा कि किसी भी देश के सैन्य जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान का रुख साफ है कि इस जलमार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोलने की बात अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री नाकेबंदी और अन्य hostile कदमों को हटाने पर ही निर्भर करती है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों पर चल रही है बहस
इस ताजा समझौते ने 7 अगस्त 2026 की उन पुरानी रिपोर्टों को पीछे छोड़ दिया है जिनमें बिना किसी ट्रांजिट फीस के इस जलमार्ग को 60 दिनों के लिए अस्थायी रूप से खोलने की बात कही गई थी। हॉर्मूज जलडमरूमध्य यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी यानी UNCLOS के नियमों के तहत आता है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए ट्रांजिट पैसेज की गारंटी देता है। हालांकि, एकतरफा टोल वसूलने की कानूनी वैधता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी भी बहस जारी है, खासकर इसलिए क्योंकि ईरान ने इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर तो किए हैं लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की है। IRGC की इस घोषणा में समझौते की कोई खास वित्तीय राशि या समय सीमा की जानकारी नहीं दी गई है।