Strait of Hormuz: ओमान और ईरान के बीच बनी नई सहमति, समुद्री सुरक्षा के लिए तैयार हुआ नया सुरक्षा मॉडल

होरमुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। Iran और Oman ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते के प्रबंधन के लिए एक नई रूपरेखा तैयार की है। 7 अगस्त 2026 को ईरानी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच एक खास समझौते पर सहमति बन गई है। यह व्यवस्था उस पुराने तरीके से बिल्कुल अलग है जो युद्ध से पहले लागू था।
नई सुरक्षा व्यवस्था और कामकाज का तरीका
ईरानी संसद के नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के प्रवक्ता Hassan Ghashghavi ने जानकारी दी है कि इस समझौते का ढांचा तैयार हो चुका है। इस नई व्यवस्था के तहत, समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए ईरान और ओमान ने जिम्मेदारी बांटी है। अब Iran होरमुज जलडमरूमध्य में आने वाले कमर्शियल जहाजों पर नियंत्रण रखेगा, जबकि Oman उन जहाजों के बाहर निकलने की प्रक्रिया की देखरेख करेगा। ईरानी अधिकारियों का साफ कहना है कि हालात अब युद्ध से पहले जैसे बिल्कुल नहीं रहेंगे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने बताया कि यह समझौता अभी अपने अंतिम दौर में है और इसके लिए जरूरी भौगोलिक कोऑर्डिनेट्स यानी नक्शे की दूरी भी तय कर ली गई है। IRNA न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा।
क्या है समझौते की अवधि और असर
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi के अनुसार, यह नई ट्रांजिट व्यवस्था फिलहाल लगभग 60 दिनों के लिए लागू होगी। इसे आगे बढ़ाने का फैसला हालात और लंबी अवधि के समाधान को देखते हुए लिया जा सकता है। खास बात यह है कि इस नई व्यवस्था के तहत शुरू में जहाजों से कोई शुल्क यानी टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाए रखना है ताकि लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म किया जा सके।
इस पूरे मामले पर अमेरिका का भी रुख सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने होरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में इसे प्रगति बताया है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी कोई अंतिम डील साइन नहीं हुई है। अमेरिका लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि होरमुज से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के होनी चाहिए। पूरी जानकारी के लिए आप UniIndia की रिपोर्ट देख सकते हैं। भारत से खाड़ी देशों में जाने वाले सामान और तेल के जहाज इस मार्ग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह नई व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद मायने रखती है।