ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 14 जुलाई 2026 को यह जानकारी दी कि उन्होंने अपने ऑपरेशन Nasr-2 के तीसरे चरण में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई में दुश्मनों के हथियारों के गोदाम, विमानों के पुर्जे और MQ9 ड्रोन के लॉन्च पैड को नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान का कहना है कि यह हमला दक्षिणी ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों का जवाब है।
ℹ: Qeshm Island पर अमेरिकी हमले का मामला, ईरान ने दी जानकारी: आम नागरिकों को नहीं हुआ नुकसान।
हमले में किन जगहों को बनाया निशाना
इस हमले के दौरान जॉर्डन के Prince Hassan Air Base पर तैनात अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन के हैंगर को निशाना बनाया गया। इसके अलावा बहरीन में मौजूद Juffair Base और शेख ईसा एयरबेस पर भी मिसाइलें और ड्रोन दागे गए, जहाँ रडार सिस्टम और फ्यूल डिपो मौजूद थे। ईरान की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमले हुए हैं।
अमेरिका और ईरान का आमना-सामना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उन्होंने दक्षिणी ईरान में सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। IRGC ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका की तरफ से आक्रामकता जारी रहेगी, तब तक वे भी अपना सैन्य अभियान जारी रखेंगे। साथ ही, उन्होंने जॉर्डन की जनता से अपील की है कि वे अपने देश से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाने की मांग करें।
