ईरान का Operation True Promise 4: कुवैत और यूएई समेत कई अमेरिकी बेस पर बड़ा हमला, खाड़ी देशों में मंडराया खतरा
ईरान और उसके सहयोगी गुटों ने ‘Operation True Promise 4’ के तहत अमेरिका और इजराइल के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं. ईरानी मीडिया Press TV के हवाले से ANI News ने बताया कि ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से लगातार 27 बार हमले किए. इस हमले का असर कुवैत, इराक और खाड़ी के अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हुआ है. पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने यह जवाबी कार्रवाई की है.
खाड़ी देशों में कहाँ-कहाँ हुए हमले?
ईरान की सेना और IRGC ने मिलकर इस ऑपरेशन को ‘या हैदर करार’ कोड नेम दिया है. इस हमले में कुवैत के Al-Ada’iri US helicopter base को निशाना बनाया गया. यहाँ हेलीकॉप्टर असेंबली सेंटर और फ्यूल टैंक पर बैलिस्टिक मिसाइलें गिरी हैं. इसके अलावा ईरान ने कई अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी और इजराइली ठिकानों को भी टारगेट किया है.
| देश | टारगेट किए गए बेस |
|---|---|
| Kuwait | Ali Al Salem और Al-Ada’iri बेस |
| UAE | Al-Dhafra Air Base |
| Bahrain | Salman Port |
| Qatar | Al-Udeid बेस |
| Israel | Tel Aviv, Haifa और Be’er Sheva |
आम लोगों और दुनिया पर क्या असर पड़ रहा है?
इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और प्रवासियों की चिंता बढ़ गई है. ईरान ने Strait of Hormuz को समुद्री जहाजों के लिए बंद कर दिया है, जिससे ग्लोबल शिपिंग पर बुरा असर पड़ा है. इसका सीधा असर दुनिया भर के बाज़ार पर दिख रहा है. तेल और कोयले की कीमतों में भारी उछाल आया है. इजराइल के कई शहरों में लगातार सायरन बज रहे हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
किन हथियारों का इस्तेमाल कर रहा ईरान?
ईरान ने इन हमलों में अपने सबसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है. इसमें नई पीढ़ी की सॉलिड-फ्यूल Kheibar-Shekan, Emad और Qadr मिसाइलें शामिल हैं. इसके साथ ही हज़ारों ड्रोन और समंदर में बिना इंसान वाले Shahbad जहाजों का भी उपयोग किया जा रहा है. ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही दुश्मन के रडार सिस्टम को नाकाम कर दिया था, जिससे ये ताज़ा हमले ज़्यादा सटीक लगे हैं.





