ईरान के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पाकिस्तान के बीच-बचाव की वजह से उन्होंने 8 अप्रैल को हुए सीजफायर उल्लंघन का जवाब नहीं दिया। पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif लगातार ईरान और अन्य देशों के संपर्क में हैं। अब 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत पर पूरी दुनिया की नज़र है।

ईरान ने हमला क्यों नहीं किया और पाकिस्तान का इसमें क्या रोल है?

ईरान का कहना है कि वे 8 अप्रैल को हुए उल्लंघन का करारा जवाब देने की पूरी तैयारी में थे, लेकिन पाकिस्तान के अनुरोध पर उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए। पाकिस्तानी पीएम Shehbaz Sharif ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बात की और उन्हें संयम बरतने की सलाह दी। पाकिस्तान की इस मध्यस्थता की तारीफ चीन और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी की है। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की एक बड़ी मीटिंग होने वाली है, जहाँ इस अस्थाई समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

सीजफायर के उल्लंघन और मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी

ईरान ने आरोप लगाया है कि समझौते के बाद भी कई बार नियमों को तोड़ा गया है। ईरान की तरफ से 10 सूत्रीय शर्तें रखी गई हैं जिनमें लेबनान में पूरी तरह युद्ध रोकना और Strait of Hormuz की सुरक्षा शामिल है। नीचे दी गई जानकारी से आप मौजूदा स्थिति को आसानी से समझ सकते हैं:

दिनांक महत्वपूर्ण घटना विवरण
8 अप्रैल 2026 नियमों का उल्लंघन ईरानी एयरस्पेस में ड्रोन देखा गया और लेबनान में हमले की खबरें आईं।
9 अप्रैल 2026 ईरान का आधिकारिक बयान पाकिस्तान के हस्तक्षेप की वजह से जवाबी कार्रवाई को रोका गया।
10 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद मीटिंग अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच शांति के लिए बड़ी बैठक होगी।

ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने पहले ही चेतावनी दी है कि सीजफायर की शर्तों का पालन नहीं हो रहा है। ईरान का कहना है कि अगर उनके हितों की रक्षा नहीं हुई तो वे चुप नहीं बैठेंगे। पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश इस समय पूरी कोशिश कर रहे हैं कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात दोबारा पैदा न हों और बातचीत के जरिए मामला सुलझा लिया जाए।