ईरान और पाकिस्तान ने मिलकर अमेरिका को एक नया और संशोधित प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच चल रही जंग को रोकना और दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्ते हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रविवार 24 मई 2026 तक अपना फैसला ले सकते हैं। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और कतर भी इसमें मदद कर रहा है।
ईरान के प्रस्ताव में क्या शर्तें रखी गई हैं?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि ईरान 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (MOU) को अंतिम रूप दे रहा है। यह शुरुआती तौर पर 30 से 60 दिनों के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करेगा। ईरान की प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
- जंग को सभी मोर्चों पर पूरी तरह से रोका जाए, जिसमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल है।
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे व्यापार के लिए दोबारा खोला जाए।
- ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म किया जाए।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इस शुरुआती समझौते से अलग रखा जाएगा और इस पर बाद में बात होगी।
ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने चेतावनी दी है कि अगर दोबारा जंग शुरू हुई तो इसका अंजाम और भी बुरा होगा।
अमेरिका और पाकिस्तान का इस समझौते पर क्या कहना है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बातचीत पर थोड़ी उम्मीद जताई है लेकिन साथ ही कुछ कड़े नियम भी सामने रखे हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, उसे अपना संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल टैक्स के सभी के लिए खोलना होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान की सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर तेहरान में बातचीत कर रहे हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है और समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलना क्यों जरूरी माना जा रहा है?
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल और व्यापारिक मार्ग है। जंग के कारण अमेरिकी नौसेना ने यहां नाकेबंदी की हुई थी जिससे 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों के रास्ते बदलने पड़े थे। इसे खोलने से वैश्विक व्यापार सामान्य हो सकेगा।
इस शांति समझौते में कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं?
इस समझौते में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है। इसके साथ ही कतर ने भी अपने वरिष्ठ अधिकारी को तेहरान भेजा है ताकि दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सके।
