ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक बार फिर अहम भूमिका निभा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची खास तौर पर इस्लामाबाद पहुंचे हैं ताकि बातचीत के जरिए मसलों को सुलझाया जा सके. इस बीच अमेरिका भी अपने खास दूतों को पाकिस्तान भेज रहा है ताकि युद्धविराम समझौते पर काम किया जा सके.

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पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान का रुख

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अपना पूरा भरोसा जताया है. उन्होंने साफ कहा कि जब तक कोई नतीजा नहीं निकलता, ईरान पाकिस्तान के नेतृत्व वाली इन कोशिशों में हिस्सा लेता रहेगा. इस दौरे के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की.

  • कोई सीधी बात नहीं: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं होगी.
  • संदेशों का आदान-प्रदान: दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए पाकिस्तानी अधिकारी ही संदेश पहुंचाने का काम करेंगे.
  • मुख्य मकसद: इस दौरे का मकसद क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है.

अमेरिका के दूत और युद्धविराम की स्थिति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अपने दो खास दूतों, स्टीव विटकोफ़ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजने का फैसला किया है. ये दूत ईरान के साथ दूसरे दौर की युद्धविराम बातचीत में शामिल होंगे.

  • ट्रंप का फैसला: राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही ईरान के साथ युद्धविराम की समय सीमा बढ़ा दी थी ताकि तेहरान एक ठोस प्रस्ताव पेश कर सके.
  • पिछली बातचीत: 11 और 12 अप्रैल को हुई पिछली बातचीत में कोई सफलता नहीं मिली थी, जिसके बाद अब पाकिस्तान के जरिए कोशिशें तेज की गई हैं.
  • दौरे का विस्तार: विदेश मंत्री अरगची का यह दौरा केवल इस्लामाबाद तक सीमित नहीं है, वह मस्कट और मॉस्को का भी दौरा करेंगे.