Iran News: ईरान की संसद ने मीडिया और पढ़ाई पर विदेशी दखल रोकने के लिए पास किया नया सख्त बिल.

Sushma Kumari19 August 20263 min read51 viewsWorld
Iran News: ईरान की संसद ने मीडिया और पढ़ाई पर विदेशी दखल रोकने के लिए पास किया नया सख्त बिल.

ईरान की संसद यानी Majlis ने विदेशी दखलंदाजी और जासूसी को रोकने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। ईरान की संसद ने रविवार, 16 अगस्त 2026 को विदेशी घुसपैठ से निपटने वाले एक नए बिल के मुख्य ढांचे को मंजूरी दे दी है। इस नए प्रस्ताव का नाम Countering the Infiltration of Intelligence Services and Foreign Governments or Institutions रखा गया है, जिसे संसद में 183 वोट मिले हैं। इसके बाद बुधवार, 19 अगस्त 2026 को इस कानून का पूरा 33-आर्टिकल वाला ड्राफ्ट भी जारी कर दिया गया है, जिसे अब संसद और गार्डियंस काउंसिल की फाइनल मंजूरी मिलने का इंतजार है।

मीडिया और डेटा शेयरिंग पर कड़ी पाबंदियां

इस नए कानून के तहत देश के गृह मंत्रालय यानी Ministry of Interior को एक नया रजिस्ट्रेशन पोर्टल बनाने का निर्देश दिया गया है। इस पोर्टल पर विदेशी संस्थाओं से जुड़े सभी कामों, जैसे आंकड़े, डेटा और रिपोर्ट के आदान-प्रदान की पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके अलावा मीडिया सेक्टर पर भी बहुत सख्त शिकंजा कसा गया है। अब कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के विदेशी मीडिया घरानों से संपर्क नहीं रख पाएगा। इतना ही नहीं, किसी भी तरह के ऑडियो, वीडियो या फोटो को गैर-ईरानी मीडिया को भेजना अब पूरी तरह से अपराध माना जाएगा।

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पढ़ाई और रिसर्च पर भी पहरा

नए नियमों के मुताबिक, देश के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विदेशी सहयोग अब बेहद सीमित कर दिया जाएगा। अब केवल उन्हीं संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग हो सकेगा जिन्हें खुफिया मंत्रालय यानी Ministry of Intelligence हर साल पहले से मंजूरी देगा। अगर कोई इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसे जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। इसके अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालयों को खुफिया मंत्रालय के साथ मिलकर स्कूली पाठ्यक्रम में 'दुश्मन की घुसपैठ' के प्रति जागरूकता को शामिल करने का निर्देश दिया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में पढ़ाया जा सके।

सांस्कृतिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी सजा

इस कानून के मुख्य निशाने पर सांस्कृतिक क्षेत्र भी है। इसके तहत ऐसी किसी भी कला या काम पर रोक लगा दी गई है जो धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हो या फिर ईरान की छवि को दुनिया के सामने गलत तरीके से पेश करती हो। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए 6 महीने से लेकर कई साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं, अगर कोई विदेशी इशारे पर देश की सुरक्षा या जनविश्वास को नुकसान पहुंचाने वाली जानकारी फैलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे अधिकतम 30 साल तक की लंबी सजा मिल सकती है। इन मामलों की सुनवाई सीधे क्रांतिकारी अदालतों यानी Revolutionary Courts में होगी और इसकी मुख्य जांच एजेंसियां खुफिया मंत्रालय और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की खुफिया विंग यानी IRGC Intelligence होंगी।

प्रशासन और जानकारों की चिंताएं

सांसद Ruhollah Nejabat का कहना है कि इस कानून का मकसद बाहरी दुश्मनों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कानूनी कमियों को दूर करना है, जबकि समिति के प्रवक्ता Hassan Ghashghavi का मानना है कि जासूसी के मौजूदा कानून इस खतरे से निपटने के लिए नाकाफी हैं। हालांकि, राष्ट्रपति Pezeshkian की सरकार ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है। सरकार का साफ कहना है कि इससे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा, देश से प्रतिभाओं के बाहर जाने यानी brain drain की समस्या और ज्यादा बढ़ेगी तथा ईरानी समाज दुनिया से पूरी तरह कट जाएगा। आलोचकों का यह भी तर्क है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही ऐसे खतरों से निपटने में सक्षम हैं और इस नए कानून से केवल देश में सेंसरशिप और सख्ती बढ़ेगी। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अमेरिका के साथ पुराना समझौता भी खत्म हो चुका है।

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