ईरान और अमेरिका के बीच हुआ 14 दिनों का शांति समझौता अब संकट में नजर आ रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने बयान जारी कर कहा है कि संघर्षविराम के उल्लंघन की भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने साफ किया कि मौजूदा हालातों में बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता है क्योंकि तय किए गए नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुआ यह समझौता 8 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ था, लेकिन एक दिन के भीतर ही इसमें दरार आ गई है।

ईरान ने किन मुख्य बातों को लेकर जताई नाराजगी?

ईरानी स्पीकर गालिबाफ के अनुसार 10 सूत्रीय सीजफायर प्रस्ताव के तीन बड़े नियमों को तोड़ा गया है। इन उल्लंघनों की वजह से ईरान अब समझौते से पीछे हटने पर विचार कर रहा है।

  • लेबनान पर हमले: ईरान का कहना है कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल था, लेकिन इजरायल ने वहां हमले जारी रखे हैं।
  • ड्रोन की घुसपैठ: ईरान के फार्स प्रांत के लार शहर में एक घुसपैठिया ड्रोन घुस आया था जिसे ईरानी सेना ने मार गिराया।
  • यूरेनियम अधिकार: ईरान को यूरेनियम संवर्धन के हक से वंचित करने की कोशिश की जा रही है जो समझौते के खिलाफ है।
  • इजरायल का रुख: इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान में अपनी कार्रवाई को इस सीजफायर का हिस्सा नहीं मानता।

अमेरिका की शर्तें और वर्तमान हालात क्या हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से खोलने की शर्त रखी है। अमेरिका ने कहा है कि जब तक सभी नियम नहीं माने जाते, उनकी सेना ईरान के आस-पास ही तैनात रहेगी। इस बीच खाड़ी देशों में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीमी बनी हुई है और सुरक्षा को लेकर काफी सावधानी बरती जा रही है।

मुख्य अधिकारी देश/संस्था भूमिका
मोहम्मद बागेर गालिबाफ ईरान संसद अध्यक्ष
अब्बास अराकची ईरान विदेश मंत्री
डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका राष्ट्रपति
पाकिस्तान मध्यस्थ शांति समझौता कराने वाला

सऊदी अरब ने भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट किया है। सऊदी क्राउन प्रिंस ने पहले ही कहा है कि वे अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देंगे। फिलहाल शुक्रवार को पाकिस्तान में होने वाली अगली दौर की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं कि क्या यह युद्धविराम टिका रहेगा या नहीं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.