अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग में आयोजित नाटो बैठक के दौरान कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ताओं में थोड़ी प्रगति और हलचल देखी गई है। हालांकि, रूबियो ने इस प्रगति को लेकर बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बात करने से मना किया है, लेकिन उन्होंने इसे एक अच्छा संकेत माना है। इस वार्ता में पाकिस्तान मुख्य रूप से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है ताकि इस क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सके।

अमेरिका की क्या हैं मुख्य शर्तें और ट्रंप का क्या है रुख?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ किया कि अमेरिका अपनी दो मुख्य रणनीतिक मांगों पर पूरी तरह अडिग है। पहली मांग तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकना है और दूसरी मांग हॉरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित करना है।

  • डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि वे गंभीर बातचीत के कारण सैन्य कार्रवाई टाल रहे हैं, लेकिन अगर सही जवाब नहीं मिला तो युद्ध की स्थिति फिर बन सकती है।
  • टोल टैक्स का विरोध: अमेरिका ने ईरान के उस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है जिसमें ओमान के साथ मिलकर जहाजों पर टोल टैक्स लगाने की बात कही गई थी। रूबियो ने कहा कि दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं करेगा।
  • प्लान बी की तैयारी: यदि ईरान हॉरमुज जलडमरूमध्य को खोलने से मना करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास एक वैकल्पिक योजना तैयार है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ईरान की वर्तमान प्रतिक्रिया क्या है?

इस शांति वार्ता को सफल बनाने में पाकिस्तान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री ने इस हफ्ते दो बार तेहरान का दौरा किया है। इसके अलावा, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी शांति वार्ता के सिलसिले में तेहरान के दौरे पर हैं।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार अमेरिकी प्रस्ताव का एक अंतिम मसौदा जल्द ही सामने आ सकता है। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव पर समीक्षा की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है क्योंकि दोनों पक्षों की मांगें काफी ऊंची हैं और यूरेनियम संवर्धन का मुद्दा अब भी एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

ईरान के सैन्य विंग की ताजा गतिविधि

शांति वार्ताओं के बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नौसेना ने बताया कि पिछले 24 घंटों में उनकी अनुमति और समन्वय के साथ 35 तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों ने हॉरमुज जलडमरूमध्य को पार किया है। इससे स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है और अमेरिका इस जलमार्ग को पूरी तरह टोल-फ्री रखने की मांग कर रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बातचीत के बारे में क्या कहा?

मार्को रूबियो ने स्वीडन में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन वे इसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहते। अमेरिका अपनी परमाणु और समुद्री सुरक्षा की शर्तों पर अडिग है।

इस शांति वार्ता में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस वार्ता में मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री और सेना प्रमुख लगातार तेहरान का दौरा कर दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में जुटे हैं।

हॉरमुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद क्या है?

ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर एक टोल सिस्टम लागू करना चाहता है, जिसका अमेरिका और उसके सहयोगी कड़ा विरोध कर रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग पूरी तरह टोल-फ्री और सुरक्षित रहे।