Iran Petrochemical Attack: ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट पर भीषण हमला, इसराइल ने ली जिम्मेदारी, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव.
ईरान और इसराइल के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। 7 अप्रैल 2026 को ईरान के महशहर शहर में स्थित एक बड़े पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमला हुआ है। इस हमले के पीछे इसराइल और अमेरिका की सेना का हाथ बताया जा रहा है। इसराइल ने खुद स्वीकार किया है कि उसने ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने के लिए उसके एनर्जी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस स्थिति को देखते हुए सऊदी अरब ने भी अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और किंग फहद कॉजवे को बंद कर दिया है।
ईरान के किन ठिकानों पर हुए हमले और क्या रहा नुकसान?
ईरान के कई शहरों में पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को निशाना बनाया गया है। इसमें महशहर, शिराज और असलौयेह (Asaluyeh) जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इसराइली सेना के प्रवक्ता के अनुसार, इन जगहों पर मिसाइल प्रोपेलेंट और विस्फोटक बनाने के लिए जरूरी केमिकल तैयार किए जाते थे। ईरान की नेशनल पेट्रोकेमिकल कंपनी ने पुष्टि की है कि इन हमलों की वजह से कई जगहों पर आग लगी थी। 5 अप्रैल को हुए हमलों में 5 लोगों की मौत और 170 लोगों के घायल होने की खबर है।
सऊदी अरब और प्रवासियों पर क्या होगा इसका असर?
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंता पैदा करने वाली है। सऊदी अरब के जुबैल में भी एक पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमला हुआ है जिसके बाद वहां आग लग गई। सऊदी अधिकारियों ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। सुरक्षा के मद्देनजर सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाले किंग फहद कॉजवे (King Fahd Causeway) को बंद कर दिया गया है।
| स्थान | घटना का विवरण | तारीख |
|---|---|---|
| महशहर (Mahshahr) | स्पेशल पेट्रोकेमिकल ज़ोन पर हमला | 7 अप्रैल 2026 |
| शिराज (Shiraz) | केमिकल बनाने वाले प्लांट पर स्ट्राइक | 6 अप्रैल 2026 |
| जुबैल (Jubail) | सऊदी प्लांट पर हमला और आग | 7 अप्रैल 2026 |
| किंग फहद कॉजवे | सुरक्षा कारणों से बंद किया गया | 7 अप्रैल 2026 |
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम (Ceasefire) के समझौते को भी ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटाए जाते और स्थाई शांति की गारंटी नहीं मिलती, वह अपनी रक्षा में जवाब देता रहेगा। इस तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और वहां से आने-जाने वाली उड़ानों पर भी असर पड़ने की संभावना है।




